बंजारी (छपारा) में अनुभूति कैंप का सफल आयोजन
किताबों से निकलकर जंगल की पगडंडियों पर रची गई अनुभूति की नई इबारत
Seoni 24 January 2026
23 जनवरी को बंजारी (छपारा) स्थित कक्ष क्रमांक 1210 (पी.एफ.) में किया गया।यह शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को प्रकृति, वन और पर्यावरण से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।

गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में वन रक्षक मनीष चौधरी, वन परिक्षेत्र अधिकारी शरद सिंह (छपारा),
एसडीओ मनेंद्र सिंह, संयुक्त वन मंडल अधिकारी गोपाल सिंह
एवं एसडीओ फॉरेस्ट राहुल शर्मा की विशेष उपस्थिति रही।
मुख्य अतिथि का संदेश
मुख्य अतिथि जयदीप चौहान ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा —
“माँ से भी बड़ी माँ प्रकृति है। जल, जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है।”
वन विभाग का स्पष्ट संदेश
संयुक्त वन मंडल अधिकारी गोपाल सिंह ने बताया कि –
वन विभाग द्वारा
अवैध वृक्ष कटान पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाती है,
वहीं विभागीय वृक्ष कटान
पूर्णतः वैज्ञानिक कार्ययोजना के अंतर्गत ही किया जाता है।
एसडीओ मनेंद्र सिंह ने प्रकृति प्रेम पर प्रकाश डालते हुए
चिड़ियों के अस्तित्व और उनके अभाव के दुष्परिणामों को समझाया तथा
जंगल से जीवन की शुरुआत पर महत्वपूर्ण विचार रखे।
वन अपराध व संरक्षण की जानकारी
वन परिक्षेत्र अधिकारी शरद सिंह ने वन अपराधों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।
वहीं मास्टर ट्रेनर अनुराधा ठाकुर ने विद्यार्थियों को
“वन दूत” के रूप में प्रेरित किया।
सुरक्षा व जैव विविधता जागरूकता
मास्टर ट्रेनर शिवानी बघेल ने जहरीले सर्पों से बचाव एवं आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी।
कैंप के दौरान विद्यार्थियों को जंगल भ्रमण कराया गया,
जहाँ उन्होंने
परागण की प्रक्रियाओं — पक्षी, हवा, जल और जानवरों की विष्ठा के माध्यम से होने वाले परागण —
की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की।
एसडीओ फॉरेस्ट राहुल शर्मा ने मधुमक्खियों के संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि-
इनके बिना प्रकृति का संतुलन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।
सहभागिता करने वाले विद्यालय
- शासकीय हाई स्कूल गणेशगंज
- शासकीय माता सवरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर, छपारा
- शासकीय हाई स्कूल देवगांव
- संदीपनी विद्यालय, छपारा
- शासकीय हाई स्कूल देवरी
अनुभूति कैंप का उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रकृति, वन एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता विकसित करना रहा, जिसमें यह कार्यक्रम पूर्णतः सफल सिद्ध हुआ।



