शराब में मिलावट पर हंगामा, पेयजल में ज़हर पर चुप्पी क्यों?
मां बैनगंगा में प्रदूषण को लेकर जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन और सत्ता से पूछे तीखे सवाल
Seoni 02 January 2026
सिवनी यशो:- प्रदेश में यदि कहीं शराब में मिलावट की खबर भर आ जाए, तो पंचायत से लेकर संसद तक हंगामा मच जाता है, बयानबाज़ी शुरू हो जाती है और प्रशासन रातों-रात हरकत में आ जाता है।
लेकिन जब आम आदमी की सबसे बुनियादी और जीवनदायिनी आवश्यकता — पीने के पानी में ज़हर घोला जा रहा हो, तब
❓ जनप्रतिनिधि चुप क्यों हैं?
❓ प्रशासन मौन क्यों है?
❓ क्या जनता की ज़िंदगी अब प्राथमिकता नहीं रही?
सिवनी जिले की पवित्र एवं जीवनरेखा मानी जाने वाली मां बैनगंगा नदी को लेकर यही सवाल आज पूरे जिले में गूंज रहा है।
पवित्र नदी में ज़हर, फिर भी खामोशी
गोपालगंज क्षेत्र में स्थित एम.के.पी.एस. राइस मिल पर गंभीर आरोप हैं कि मिल द्वारा
👉 केमिकल युक्त
👉 अपिष्ट
👉 गंदा व जहरीला पानी
सीधे मां बैनगंगा नदी में छोड़ा जा रहा है।
यही नदी
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सिवनी शहर व सैकड़ों गांवों की पेयजल आपूर्ति का आधार है
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हजारों हेक्टेयर खेतों की सिंचाई इसी से होती है
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धार्मिक दृष्टि से यह नदी आस्था और संस्कारों का केंद्र है
इसके बावजूद प्रदूषण पर प्रशासनिक चुप्पी लोगों को हैरान कर रही है।
शहर से गांव तक खतरे में स्वास्थ्य
ग्रामीणों का कहना है कि
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वही दूषित पानी पीने के लिए उपयोग हो रहा है
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उसी से मवेशी और पशु-पक्षी प्यास बुझा रहे हैं
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वही पानी आगे जाकर भीमगढ़ डेम में एकत्रित होता है, जहां से सिवनी शहर को जलापूर्ति होती है
ऐसे में सवाल उठता है—
क्या प्रशासन किसी बड़े स्वास्थ्य संकट का इंतज़ार कर रहा है?
यह केवल प्रदूषण नहीं, आस्था पर हमला है
मां बैनगंगा केवल जलधारा नहीं,
👉 यह आस्था है
👉 यह संस्कार है
👉 यह जीवन है
जिस नदी के तट पर
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पूजन-पाठ
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हवन
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धार्मिक अनुष्ठान
होते हों, उसमें औद्योगिक कचरा बहाना धार्मिक भावनाओं पर सीधा प्रहार है।
जब जिम्मेदार चुप रहे, तो जमीनी जनप्रतिनिधि बोले
प्रशासनिक उदासीनता से आहत होकर
👉 जिला पंचायत सदस्य
👉 ग्रामीण पंचायतों के पंच-उपसरपंच
👉 ग्रामीण नागरिक
ने संयुक्त रूप से
मुख्यमंत्री मोहन यादव,
जिला कलेक्टर सिवनी
सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर
कठोर एवं त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और आस्था — तीनों पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
सवाल सीधा है, जवाब कौन देगा?
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क्या शराब में मिलावट जनता की जान से बड़ी समस्या है?
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क्या उद्योग का मुनाफा इंसानी स्वास्थ्य से ऊपर है?
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क्या मां बैनगंगा की पवित्रता की कोई कीमत नहीं?
आज ज़हर पानी में है,
👉 कल अस्पतालों में भीड़ होगी,
👉 परसों श्मशान में।
अब निगाहें प्रशासन पर
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने साफ कर दिया है कि
यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो
📢 जनआंदोलन
📢 कानूनी लड़ाई
📢 और सड़क पर उतरकर विरोध
का रास्ता अपनाया जाएगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन जनता की आवाज़ सुनता है या चुप्पी साधे रहता है।
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