हरियाली की हत्या: मुख्य वन संरक्षक कार्यालय के सामने ही कटे 35 साल पुराने वृक्ष, अधिकारी मौन!
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था — एक वृक्ष की हत्या, एक इंसान की हत्या से कम नहीं; पर सिवनी में संवेदनशीलता कट गई कुल्हाड़ी से
Seoni 11 November 2025
सिवनी यशो:- जहाँ देशभर में पर्यावरण संरक्षण के नारे बुलंद किए जा रहे हैं, वहीं सिवनी में “पेड़ बचाओ” का संदेश एक बार फिर कटे हुए ठूंठों के बीच दबकर रह गया।
भारतीय स्टेट बैंक कॉलोनी के गार्डन परिसर में 30 से 35 वर्ष पुराने शीशम, गुलमोहर और अन्य छायादार वृक्षों को बेरहमी से काट दिया गया —
और यह सब उस स्थान पर हुआ, जहाँ से मुख्य वन संरक्षक अधिकारी (CCF) का कार्यालय मात्र कुछ ही दूरी पर स्थित है।

सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी हुई बेमानी
कुछ माह पूर्व सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश ने कहा था —
“एक वृक्ष का कटना, एक हत्या से कम नहीं।”
यह कथन सिवनी की इस घटना पर सटीक बैठता है,
जहाँ वृक्षों की ‘हत्या’ के वक्त न वन विभाग की संवेदना जागी,
न प्रशासन का उत्तरदायित्व।
मुख्य वन संरक्षक कार्यालय के निकट भी जागरूकता नहीं
घटना स्थल से मुख्य वन संरक्षक (CCF) कार्यालय की दूरी कुछ ही गज है।
जब वृक्ष काटे जा रहे थे, तब उपस्थित नागरिकों ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों को इसकी सूचना दी।
परंतु कर्मचारियों ने तत्काल कार्रवाई करने के बजाय यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि —
“आप दक्षिण वन परिक्षेत्र कार्यालय को सूचना दें।”
ध्यान देने योग्य बात यह है कि वन परिक्षेत्र कार्यालय की दूरी लगभग पाँच किलोमीटर है।
इस बीच आपत्तिकर्त्ता के वहाँ पहुँचने में समय लगता, और तब तक कई और वृक्ष गिराए जा सकते थे।
ऐसी स्थिति में मुख्य वन संरक्षक कार्यालय द्वारा आदेशात्मक कार्रवाई तुरंत की जा सकती थी,
जो नहीं की गई — यह विभागीय उदासीनता का प्रतीक है।

बिना अनुमति कटे वृक्ष, आरोपी फरार
स्थानीय लोगों ने बताया कि कॉलोनी के एक व्यक्ति ने यह कहकर वृक्ष कटवाने शुरू किए कि “सीएमओ से अनुमति ली है।”
जब रहवासियों ने लिखित अनुमति माँगी तो उन्होंने कहा – “घर पर रखी है।”
विरोध बढ़ा तो स्थिति को देखते हुए डायल 112 पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस के आने से पहले ही आरोपी और उसकी पत्नी वहाँ से फरार हो गए।
पुलिस ने मौके पर पहुँचकर वृक्ष कटाई रुकवाई और कार्रवाई का आश्वासन दिया।
नगरपालिका और वन विभाग दोनों के अधिकार क्षेत्र पर सवाल
नगरपालिका द्वारा यदि वास्तव में अनुमति दी गई है,
तो यह पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और वन संरक्षण नियम 2003 का खुला उल्लंघन है।
सवाल यह भी है कि क्या नगर पालिका (CMO) को इस प्रकार की अनुमति देने का अधिकार है?
या फिर यह जिम्मेदारी केवल वन विभाग की है —
जो अपने ही कार्यालय के सामने हो रही अवैध कटाई से अनजान बना रहा।
कॉलोनीवासियों का आक्रोश
कॉलोनी के निवासियों ने कहा —
“यह पेड़ हमारे परिवार का हिस्सा थे। गर्मी में छाँव देते थे, हवा को शुद्ध करते थे।
अब वही लोग कह रहे हैं कि पेड़ कचरा गिराते हैं। क्या थोड़े कचरे से बड़ी समस्या वह प्रदूषण नहीं, जो इनकी कटाई से फैलता है?”
नागरिकों की माँगें
मुख्य वन संरक्षक कार्यालय की भूमिका की जाँच हो।
सीएमओ द्वारा दी गई कथित अनुमति की विधिकता की समीक्षा की जाए।
दोषियों पर वन अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
कॉलोनी में नए वृक्षारोपण और सुरक्षा योजना लागू की जाए।

“हरियाली की हत्या” पर अब खामोशी नहीं
यह घटना केवल वृक्ष कटाई नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती का उदाहरण है।
जब जिले का सबसे बड़ा वन अधिकारी का कार्यालय घटनास्थल से सटा हो
और
फिर भी विभाग ‘सूचना नहीं थी’ कहकर बच निकले,
तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है —
“क्या सिवनी में पेड़ बचाने की जिम्मेदारी भी जनता को उठानी पड़ेगी?”
प्रशासन से अपेक्षा है कि वह इस पर्यावरणीय अपराध को गंभीरता से लेकर दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही करे —
क्योंकि जैसा सुप्रीम कोर्ट ने कहा था —
“वृक्ष काटना केवल प्रकृति के खिलाफ नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की साँसों के खिलाफ अपराध है।”





