गांव की बेटी से कलेक्टर तक: IAS नेहा मीना ने बदला झाबुआ, अब सिवनी में बदलाव की उम्मीद
आदिवासी विकास, कुपोषण नियंत्रण और जन भागीदारी मॉडल से सिवनी जिले को मिल सकता है नया प्रशासनिक नेतृत्व
IAS नेहा मीना सिवनी कलेक्टर: झाबुआ मॉडल से बदलाव की उम्मीद
सिवनी 11 अप्रैल 2026
सिवनी यशो:- मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले झाबुआ में जब विकास की नई कहानी लिखी जा रही थी, तब उसके केंद्र में थीं
आईएएस नेहा मीना। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने वाली
नेहा मीना आज उन अधिकारियों में गिनी जाती हैं, जिन्होंने सरकारी योजनाओं को फाइलों से निकालकर
सीधे जनता के जीवन से जोड़ा। अब IAS नेहा मीना सिवनी कलेक्टर के रूप में जिले में पहुंच रही है तो जिले को उनकी कार्यशैली का
व्यापक लाभ मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
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प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
नेहा मीना का जन्म राजस्थान के एक सामान्य परिवार में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूलों में हुई, जहां उन्होंने
सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बचपन से ही उन्हें समाज और गरीब वर्ग की समस्याओं को समझने में
रुचि थी, जिसने आगे चलकर उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण को मजबूत किया।
उच्च शिक्षा और UPSC सफर
उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान और अर्थशास्त्र में स्नातक तथा अर्थशास्त्र में परास्नातक किया।
सामाजिक और आर्थिक मुद्दों की गहरी समझ ने उन्हें UPSC की तैयारी में बढ़त दिलाई और वर्ष 2014 में उन्होंने
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में सफलता हासिल की।
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प्रशासनिक यात्रा
प्रशिक्षण के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्य किया और वर्तमान में झाबुआ जिले की कलेक्टर एवं
जिला दंडाधिकारी के रूप में सेवाएं दे रही हैं। झाबुआ जैसे आदिवासी क्षेत्र में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं था,
लेकिन उन्होंने इसे अवसर में बदल दिया।
कुपोषण के खिलाफ “मोटी-आई” अभियान
झाबुआ लंबे समय से कुपोषण की समस्या से जूझ रहा था। नेहा मीना ने “मोटी-आई” (बुजुर्ग माताएं) पहल शुरू की,
जिसमें गांव की अनुभवी महिलाओं को बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पहल ने न केवल कुपोषण कम किया,
बल्कि समाज में जागरूकता भी बढ़ाई।
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आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य
उन्होंने केंद्र सरकार के आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम को जमीन पर उतारते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में
उल्लेखनीय सुधार किए। उनके इसी कार्य के लिए उन्हें प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया।
जल संरक्षण और नवाचार
जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में उन्होंने सामुदायिक भागीदारी से जल संरक्षण कार्यों को बढ़ावा दिया और नदियों के
पुनर्जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय जल पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
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चुनाव प्रबंधन में उत्कृष्टता
चुनावों को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने कई नवाचार किए, जिससे मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई और
उन्हें बेस्ट इलेक्टोरल प्रैक्टिस अवार्ड से सम्मानित किया गया।
कार्यशैली: जमीनी जुड़ाव और नवाचार
- फील्ड विजिट और जनसंवाद पर जोर
- जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल
- डेटा आधारित निर्णय और निगरानी
- महिला और बाल विकास पर विशेष फोकस
प्रमुख सम्मान
- प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2024
- राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2020
- लैंड इक्वल प्लेटिनम अवार्ड 2023
- बेस्ट इलेक्टोरल प्रैक्टिस अवार्ड 2025
सिवनी के लिए क्यों अहम हो सकती है यह पोस्टिंग?
सिवनी जिला भी आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां कुल 8 विकासखंडों में से 5 आदिवासी प्रभाव वाले हैं, जबकि 4 विधानसभा क्षेत्रों में से
2 अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में नेहा मीना जैसी अधिकारी की कार्यशैली यहां विशेष रूप से प्रभावी साबित हो सकती है।
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जिले में वर्तमान समय में सिकल सेल, कुपोषण, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, पेयजल संकट, नशे का बढ़ता कारोबार,
नौकरशाही की मनमानी और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दे मौजूद हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए
झाबुआ में अपनाया गया उनका मॉडल सिवनी में भी लागू किया जा सकता है।
विशेष रूप से “मोटी-आई” जैसी जनभागीदारी आधारित पहल, जल संरक्षण के प्रयास और फील्ड आधारित प्रशासनिक शैली
सिवनी जिले में विकास की गति को नई दिशा दे सकते हैं।
नेहा मीना की कहानी सिर्फ एक अधिकारी की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जिसमें प्रशासन को
जनसेवा का माध्यम माना जाता है। यदि उनकी कार्यशैली सिवनी में लागू होती है, तो यह जिला भी
झाबुआ की तरह एक सफल विकास मॉडल बन सकता है।
By दैनिक यशोन्नति | सिवनी | Updated: 2026



