मुख्यमंत्री से भूमि पूजन, योजना पहले ही समाप्त! आखिर सिवनी नगर पालिका में हुआ क्या?
विधायक के पत्र ने खोले कई राज, अध्यक्ष बोले- राशि लैप्स नहीं हुई; कांग्रेस ने भी उठाए नियमों पर सवाल, अब जनता पूछ रही- जिम्मेदार कौन?
सिवनी नगर पालिका भवन विवाद: योजना खत्म, भूमि पूजन पर उठे सवाल
सिवनी यशो :- सिवनी नगर पालिका परिषद के प्रस्तावित नवीन कार्यालय भवन को लेकर इन दिनों शहर की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 1 जुलाई 2026 को भवन का भूमि पूजन किए जाने के बाद अब पूरा मामला सवालों के घेरे में है।
कारण यह है कि विधायक दिनेश राय ‘मुनमुन’ ने स्वयं मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि जिस मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना (चतुर्थ चरण) के अंतर्गत भवन निर्माण प्रस्तावित था, वह योजना पहले ही समाप्त हो चुकी है।
इसके बाद भवन निर्माण के लिए किसी अन्य मद अथवा विशेष अनुदान से राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
यहीं से पूरा विवाद शुरू होता है।

पहला सवाल- यदि योजना समाप्त हो चुकी थी तो भूमि पूजन किस आधार पर हुआ?
नगर पालिका के दस्तावेजों के अनुसार कार्यालय भवन की डीपीआर तैयार कर भोपाल भेजी गई। संभागीय अनुशंसा पर स्वीकृति प्राप्त हुई थी परंतु जिस योजना से स्वीकृति प्राप्त हुई थी वह योजना 31 मार्च 2026 में समाप्त हो चुकी थी।
समाप्त योजना से स्वीकृत योजना के तहत 01 जुलाई 2026को मुख्यमंत्री से भूमि पूजन कराया गया। लेकिन बाद में स्वयं नगर पालिका और विधायक के पत्र में यह सामने आया कि जिस योजना से राशि मिलने की उम्मीद थी, वह प्रभावी नहीं रही।
यही कारण है कि शहर में सबसे बड़ा सवाल पूछा जा रहा है कि क्या भूमि पूजन से पहले परियोजना की वित्तीय स्थिति स्पष्ट थी? यदि नहीं थी तो क्या मुख्यमंत्री को पूरी जानकारी दी गई थी?
विधायक ने अधिकारियों को बताया जिम्मेदार
इस पूरे घटनाक्रम पर विधायक दिनेश राय ‘मुनमुन’ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि नगर पालिका अधिकारियों की घोर लापरवाही सामने आई है। उन्होंने कहा कि पहले भी दलसागर लाइट एंड साउंड परियोजना प्रभावित हुई और अब नगर पालिका कार्यालय भवन का मामला सामने आया है।
विधायक ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया और लिखित पत्र भी सौंपा। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लिया है और वे स्वयं इस भवन के लिए नई स्वीकृति दिलाने का प्रयास करेंगे।
अध्यक्ष का दावा- परिषद को बदनाम किया जा रहा
दूसरी ओर नगर पालिका के कार्यकारी अध्यक्ष ज्ञानचंद सनोड़िया का कहना है कि परिषद को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार “कोई राशि लैप्स नहीं हुई है।”
हालांकि उसी बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि संबंधित योजना मार्च में समाप्त हुई थी और यदि ऐसी स्थिति है तो वे अधिकारियों से इसकी जानकारी लेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि एक मुख्य नगरपालिका अधिकारी का स्थानांतरण हो गया था और तकनीकी स्वीकृति के लिए फाइल भोपाल भेजी गई है।
यहीं से एक और सवाल खड़ा हो जाता है—यदि योजना समाप्त होने की जानकारी अध्यक्ष को नहीं थी, तो परिषद में परियोजना की निगरानी किस स्तर पर हो रही थी?
कांग्रेस ने कहा- परिषद के अपने फैसले ही बदल दिए गए
इस विवाद में कांग्रेस भी खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस पार्षदों ने कलेक्टर को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि कार्यालय भवन के लिए गुरुनानक वार्ड का स्थान परिषद की कई बैठकों में सर्वसम्मति से स्वीकृत हो चुका था।
आवेदन में कहा गया कि बाद में कार्यकारी अध्यक्ष ने भवन का स्थान बदलकर किदवई वार्ड स्थित फिल्टर प्लांट परिसर कर दिया, जो पूर्व प्रस्तावों के विपरीत था। कांग्रेस ने इस निर्णय को नियमविरुद्ध बताते हुए संबंधित बैठक को निरस्त करने की मांग की।
अध्यक्ष का तर्क- फिल्टर प्लांट परिसर ज्यादा उपयोगी
ज्ञानचंद सनोड़िया का कहना है कि फिल्टर प्लांट परिसर में जलापूर्ति, स्टोर और अन्य तकनीकी व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं। कार्यालय वहीं बनने से पूरा प्रशासनिक संचालन एक ही स्थान से हो सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पुराने राजस्व कार्यालय की भूमि को व्यावसायिक रूप से विकसित कर नगर पालिका के लिए स्थायी आय का स्रोत बनाया जा सकता है, जिससे भविष्य में शहर के विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।
अब आगे क्या होगा?
यही वह प्रश्न है जिसका जवाब हर नागरिक जानना चाहता है।
हालांकि विधायक दिनेश राय मुनमुन ने दावा किया है कि वह राशि स्वीकृत करायेंगे और नगर विकास को गति देंगे परन्तु जिम्मेदारों की लापरवाही को क्षमा नहीं किया जाना चाहिए।
यदि मूल योजना समाप्त हो चुकी है तो अब नई योजना या किसी अन्य वित्तीय मद से स्वीकृति लेनी होगी। इसके बाद प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, निविदा (टेंडर) और निर्माण प्रक्रिया फिर आगे बढ़ेगी। इसका अर्थ है कि परियोजना की समय-सीमा पहले की तुलना में आगे खिसक सकती है।
राजनीतिक हलकों में क्या चर्चा है?
सत्ताधारी दल के भीतर भी दबी जुबान में यह चर्चा है कि यदि वित्तीय स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी तो मुख्यमंत्री से भूमि पूजन कराने की जल्दबाजी से सरकार को अनावश्यक राजनीतिक सवालों का सामना करना पड़ा। हालांकि सार्वजनिक रूप से कोई नेता इस पर खुलकर टिप्पणी नहीं कर रहा।
यदि विधायक हस्तक्षेप नहीं करते तो…
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधायक दिनेश राय ‘मुनमुन’ द्वारा मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित किए जाने के बाद ही वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था की प्रक्रिया तेज हुई। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि शासन इस परियोजना के लिए नई स्वीकृति कब देता है।
अब जनता के मन में सबसे बड़े सवाल
क्या भूमि पूजन से पहले वित्तीय स्थिति की पूरी जानकारी थी?
योजना समाप्त होने के बाद भी उसी परियोजना का भूमि पूजन क्यों हुआ?
जिम्मेदारी अधिकारियों की है या जनप्रतिनिधियों की?
भवन का निर्माण आखिर कब शुरू होगा?
क्या इस पूरे घटनाक्रम की प्रशासनिक समीक्षा होगी?
फिलहाल इतना तय है कि नगर पालिका भवन का मामला अब केवल एक निर्माण परियोजना नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, राजनीतिक निर्णय और विकास कार्यों की पारदर्शिता की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
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