सिवनीमध्यप्रदेश

भूमि पूजन के बाद फंड नहीं, सरकार की किरकिरी! क्या अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं नगर पालिका अध्यक्ष?

जिस योजना से फंड मांगा गया, वह मार्च में ही हो चुकी थी समाप्त; अब विशेष अनुदान के लिए शासन से गुहार

सिवनी नगर पालिका भवन: भूमि पूजन हुआ, फंड नहीं, राजनीतिक घमासान

Seoni, 24 July 2026
सिवनी यशो:- यह भी पढ़े :- नगर पालिका परिषद सिवनी के नए कार्यालय भवन को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक सवाल खड़ा हो गया है। जिस परियोजना के लिए अभी तक वित्तीय स्वीकृति ही उपलब्ध नहीं थी, उसका 1 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भूमि पूजन करा दिया गया।

बाद में नगर पालिका परिषद ने स्वयं शासन को पत्र लिखकर स्वीकार किया कि भवन निर्माण के लिए कोई राशि उपलब्ध नहीं है और अब विशेष अनुदान अथवा अन्य मद से धनराशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जा रहा है।

दस्तावेजों के अनुसार परिषद ने भवन निर्माण के लिए मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना (चतुर्थ चरण) के अंतर्गत राशि की अपेक्षा की थी, जबकि संबंधित योजना मार्च 2026 में ही समाप्त हो चुकी थी।

क्या अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं नगर पालिका अध्यक्ष?

नगर पालिका कार्यालय भवन का भूमि पूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से कराने के बाद अब परिषद द्वारा स्वयं यह स्वीकार किया जाना कि भवन निर्माण के लिए राशि उपलब्ध नहीं है और नए मद से धनराशि मांगी जा रही है, राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है। विपक्ष का कहना है कि यदि वित्तीय स्वीकृति सुनिश्चित नहीं थी, तो भूमि पूजन कराकर सरकार की घोषणा को अधूरा दिखाने का अवसर क्यों दिया गया? उनका आरोप है कि इससे सरकार की छवि पर भी सवाल उठे हैं और विरोधियों को सरकार पर निशाना साधने का मौका मिला है।

ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि जब संबंधित योजना अस्तित्व में ही नहीं थी और वित्तीय स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई थी, तब भूमि पूजन किस आधार पर कराया गया?

नगर पालिका द्वारा मुख्यमंत्री को भेजा गया पत्र भी अब चर्चा का विषय बना हुआ है। पत्र में स्पष्ट रूप से भवन निर्माण के लिए द्वारिका नगरी, विशेष अनुदान अथवा किसी अन्य वित्तीय मद से राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।

इससे यह संकेत मिलता है कि भूमि पूजन के समय निर्माण के लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।

इस घटनाक्रम ने परिषद की योजना निर्माण, वित्तीय समन्वय और प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दल और स्थानीय जनप्रतिनिधि इसे गंभीर चूक बताते हुए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।

यदि आपके पास नगर पालिका द्वारा मुख्यमंत्री को भेजा गया पत्र और योजना समाप्त होने का आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध है, तो यह खबर और भी मजबूत बन सकती है। साथ ही, निष्पक्षता के लिए नगर पालिका परिषद या संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी अवश्य प्रकाशित करें।

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