अपेक्स बैंक प्रशासक ने छिंदवाड़ा में सहकारी बैंक के कार्यों की समीक्षा की, समितियों के नियमित भ्रमण, सदस्यता वृद्धि और किसानों से सम्मानजनक व्यवहार के दिए निर्देश
Chhindwara, 03 November 2026
छिंदवाड़ा यशो:- सहकारिता व्यवस्था की मजबूती तभी संभव है, जब सहकारी बैंक और समितियां सीधे किसानों से जुड़कर उनकी समस्याओं का समाधान करें और शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाएं।
समिति प्रबंधक एवं बैंक अधिकारी किसानों से निरंतर संपर्क बनाए रखें तथा उन्हें उपलब्ध बैंकिंग और शासकीय योजनाओं की जानकारी देकर लाभान्वित करना सुनिश्चित करें। यह निर्देश मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के प्रशासक श्री महेन्द्र सिंह यादव ने छिंदवाड़ा प्रवास के दौरान जिला सहकारी बैंक के कार्यों की समीक्षा बैठक में दिए।
समीक्षा बैठक में कलेक्टर एवं बैंक प्रशासक हरेन्द्र नारायन, बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेश रायकवार सहित विभिन्न शाखाओं के शाखा प्रभारी एवं कक्ष अधिकारी उपस्थित रहे।
किसानों तक पहुंचे योजनाओं का लाभ
बैठक में श्री यादव ने निर्देश दिए कि सभी शाखा प्रबंधक अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सहकारी समितियों का नियमित भ्रमण करें। समिति प्रबंधकों के माध्यम से किसानों से निरंतर संवाद स्थापित किया जाए और उन्हें शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देकर उनका लाभ दिलाया जाए।
उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकिंग व्यवस्था का मूल उद्देश्य किसानों को आर्थिक एवं संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराना है। इसके लिए बैंक अधिकारियों और समिति प्रबंधकों को केवल कार्यालयीन कार्यों तक सीमित न रहकर गांवों में जाकर किसानों से सीधा संपर्क करना चाहिए।
कवच योजना के प्रचार-प्रसार पर जोर
अपेक्स बैंक प्रशासक ने कृषकों को कवच योजना का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित करने तथा योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं की जानकारी प्रत्येक पात्र किसान तक पहुंचे, इसके लिए समितियां सक्रिय भूमिका निभाएं और किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं।
समितियों की सदस्यता बढ़ाएं, किसानों से रखें मधुर व्यवहार
श्री यादव ने सहकारी समितियों में सदस्यता वृद्धि के साथ-साथ स्वच्छता एवं व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि किसान सहकारी संस्थाओं की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनके साथ मधुर, सम्मानजनक और सहयोगात्मक व्यवहार किया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों एवं समिति प्रबंधकों से अपेक्षा की कि वे किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनें, उनका निराकरण करें और सहकारी संस्थाओं के प्रति किसानों का विश्वास मजबूत बनाएं।