सरकार दे रही गौ संरक्षण को प्राथमिकता, मंडला में गायें बेहाल
पशु प्रेमियों की अनदेखी, मंडला प्रशासन पर उठे सवाल
Mandla 29 August 2025
मंडला यशो:- गायों की दुर्दशा और पशु चिकित्सा व्यवस्थाओं में अव्यवस्था को लेकर मंडला प्रशासन कटघरे में है। जिला कलेक्टर परिसर के पीछे पिछले कई दिनों से पशु प्रेमी धरने पर बैठे हुए हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन गौ माता की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है, जबकि प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार गौ पालन और संवर्धन को प्राथमिकता दे रही है।
पशु प्रेमियों का धरना, बिगड़ी तबीयत
धरना स्थल पर शामिल पशु अधिकार कार्यकर्ता निशा सिंह की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष अशोक मर्सकोले और पार्टी कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे। इस पर मजबूर होकर तहसीलदार और असिस्टेंट कमिश्नर पशु चिकित्सा विभाग भी वहाँ पहुँचे और पशु प्रेमियों की समस्याओं को सुना।
पशु चिकित्सा व्यवस्था पर उठे सवाल
पशु प्रेमियों का कहना है कि जिला पशु चिकित्सालय और गौशालाओं में कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
इलाज के नाम पर केवल दवाइयाँ लिख दी जाती हैं और गरीब किसानों को उन्हें बाज़ार से खरीदना पड़ता है।
न तो आवारा पशुओं के लिए शेल्टर होम है, न ही बीमार और विकलांग गायों के लिए विशेष वार्ड की व्यवस्था।
धरने से उठीं प्रमुख मांगें
धरने में शामिल कार्यकर्ताओं ने 7 प्रमुख मांगें रखीं:
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प्रत्येक गाँव की गौचर भूमि से अतिक्रमण हटाकर उसे सुरक्षित किया जाए।
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आवारा पशुओं की नसबंदी और नियमित टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।
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नगर में बीमार और विकलांग पशुओं हेतु एनिमल शेल्टर होम बनाया जाए।
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जिला पशु अस्पताल में बीमार पशुओं के लिए भर्ती वार्ड और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
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बीमार और हादसों में घायल पशुओं की मदद के लिए रेस्क्यू दल का गठन किया जाए।
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पशु कानूनों का प्रचार-प्रसार किया जाए।
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जिले में वेटरनरी मेडिकल कॉलेज खोला जाए।
सरकार की सोच और प्रशासन की हकीकत
पशु प्रेमियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जहाँ गौ माता को सम्मान देने और संरक्षण की नीतियाँ लागू कर रहे हैं, –
वहीं मंडला प्रशासन उन योजनाओं की अनदेखी कर रहा है। इससे सरकार की महत्वाकांक्षी सोच और धरातल पर हकीकत के बीच बड़ा अंतर साफ झलक रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
धरना स्थल पर गूंज रही आवाज़ है – “जियो और जीने दो”।
पशु प्रेमियों का कहना है कि अगर उनकी मांगे जल्द पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
अब देखना होगा कि मंडला प्रशासन गायों की दुर्दशा पर कब तक चुप्पी साधे रहता है।






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