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दीपोत्सव ज्ञान और प्रकाश का पर्व - श्रीद्वारका शारदा पीठम् से जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती का शुभकामना संदेश

तमसो मा ज्योतिर्गमय”, अन्धकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ना ही दीपावली का सच्चा अर्थ है

Dwarka (Gujarat), 19 October 2025

सिवनी यशो:- पश्चिमाम्नाय श्रीद्वारका शारदा पीठ  देवभूमि द्वारका से जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कार्तिक अमावस्या के पावन अवसर पर राष्ट्रवासियों को दीपोत्सव संदेश में मंगलकामनाएँ प्रेषित कीं।

अपने दीपोत्सव“शुभकामना संदेश” में स्वामी जी ने वेदवाक्य तमसो मा ज्योतिर्गमय का उल्लेख करते हुए कहा कि —

“अन्धकार से प्रकाश की ओर जाने की कामना वेदों की शाश्वत अभ्यर्थना है। अज्ञान के अन्धकार से ज्ञानरूपी प्रकाश प्राप्त करना ही सृष्टि का परम उद्देश्य है। दीपोत्सव इसी ज्ञान की ज्योति का उत्सव है, जो अज्ञान और दरिद्रता को नष्ट कर ज्ञानलक्ष्मी की आराधना का प्रतीक है।”

उन्होंने आगे वेद मंत्र का उद्धरण देते हुए कहा —

“या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः… तां त्वां नताःस्म परिपालय देवि तुभ्यम्।”
इसका अर्थ बताते हुए स्वामी जी ने कहा कि पुण्यात्माओं के यहाँ लक्ष्मी स्वयं निवास करती हैं, असज्जनों में दरिद्रता के रूप में, और सत्पुरुषों में श्रद्धा रूप से विद्यमान रहती हैं। लक्ष्मी जगत का पोषण करने वाली महाशक्ति हैं, जिनका वन्दन करना भारतीय संस्कृति की परम परंपरा है।

स्वामी सदानन्द सरस्वती जी ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे दीपोत्सव के अवसर पर ज्ञान, सत्य और सदाचार की ज्योति अपने जीवन में प्रज्वलित करें तथा भारतीय संस्कृति के इस महान पर्व को आत्मिक उत्कर्ष का माध्यम बनाएं।

अंत में उन्होंने श्रीद्वारकाधीश भगवान के चरणों में नमन करते हुए कहा कि —

“हमारे भूरिशः शुभाशीर्वाद देशवासियों के सर्वांगीण अभ्युदय के लिए समर्पित हैं।”

यह शुभकामना संदेश पश्चिमाम्नाय श्रीद्वारकाशारदापीठम्, देवभूमि द्वारका, गुजरात से जारी किया गया।

📜 मुख्य बिंदु:

  • संदेश का विषय: अन्धकार से प्रकाश की ओर

  • पर्व: कार्तिक अमावस्या – दीपोत्सव 2025

  • तिथि: 20 अक्टूबर 2025, सोमवार

  • स्थान: श्रीद्वारकाशारदापीठम्, देवभूमि द्वारका (गुजरात)

  • संदेशदाता: जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती जी महाराज

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Dainikyashonnati

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