मध्यप्रदेशसिवनी

खुर्सीपार में अवैध शराब–गांजा से घर तबाह, महिलाओं ने खोला मोर्चा, छपारा थाने में सौंपा ज्ञापन

“बाप-बेटा दिन-रात नशे में, गृहस्थी चौपट” — प्रशासनिक चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

Seoni 03 February 2026
छपारा यशो:- नगर से सटे ग्राम खुर्सीपार एवं खुर्सीपार टोला में खुलेआम हो रही अवैध शराब और गांजा बिक्री से त्रस्त गांव की महिलाओं ने मंगलवार को आखिरकार मोर्चा खोल दिया। नशे की लत से अपने परिवारों को बर्बाद होते देख ग्राम पंचायत खुर्सीपार की सरपंच श्रीमती वैजयंती मरावी के नेतृत्व में दो दर्जन से अधिक महिलाएं छपारा पुलिस थाना पहुंचीं और थाना प्रभारी खेंमेंद्र कुमार जैतवार के नाम हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपा।

“छोटे बच्चे भी नशे की गिरफ्त में”

ज्ञापन में महिलाओं ने आरोप लगाया कि –

ग्राम खुर्सीपार और उससे लगे खुर्सीपार टोला में अवैध शराब एवं गांजा की खुलेआम बिक्री हो रही है।

हालात यह हैं कि बाप और बेटा दोनों नशे में चूर रहते हैं, जिससे घर-परिवार की आर्थिक, सामाजिक और मानसिक स्थिति पूरी तरह चौपट हो चुकी है।

छपारा थाना में अवैध शराब के खिलाफ ज्ञापन सौंपती खुर्सीपार की महिलाएं
खुर्सीपार गांव में अवैध शराब और गांजा बिक्री के खिलाफ छपारा थाना पहुंची महिलाएं ज्ञापन सौंपते हुए।

महिलाओं से मारपीट, रोज़ के विवाद

महिलाओं का कहना है कि नशे में धुत्त पुरुष आए दिन गाली-गलौज, झगड़े और महिलाओं से मारपीट जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

इससे गांव की महिलाओं और बच्चों का जीवन असुरक्षित और भय के साए में गुजर रहा है।

महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।

आधी आबादी की आवाज क्यों अनसुनी?

यह कोई पहला मामला नहीं है।

छपारा आदिवासी विकासखंड सहित जिले के कई गांवों में अवैध शराब विक्रय और

शराबबंदी की मांग को लेकर महिलाएं बार-बार आंदोलन करती रही हैं।

मंचों से “महिला प्रथम”, “नारी शक्ति” और “महिलाओं की पूजा” की बातें तो होती हैं,

लेकिन जब वही महिलाएं सड़कों पर उतरती हैं, तो उनकी आवाज नगारखाने में तूती की तरह दबा दी जाती है।

शासन-प्रशासन की भूमिका पर सवाल

महिलाओं का आक्रोश इस बात को लेकर है कि वर्षों से विरोध के बावजूद अवैध शराब का कारोबार बेखौफ जारी है।

यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता और संरक्षण की आशंका को जन्म देती है।

 पुलिस प्रशासन से महिलाओं ने तत्काल छापामार कार्रवाई, अवैध कारोबारियों पर कठोर कानूनी कदम और

गांव को नशामुक्त घोषित करने की मांग की है।

यदि आधी आबादी की इस पीड़ा को भी गंभीरता से नहीं लिया गया,
तो “महिला सम्मान” और “नारी सशक्तिकरण” केवल ढकोसले बनकर रह जाएंगे।

https://www.prabhatkhabar.com/state/bihar/kishanganj/women-have-launched-a-campaign-against-drug-abuse

Dainikyashonnati

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