नर्मदा सायकिल परिक्रमा: तप, त्याग और यात्रा — भाग -4
माँ नर्मदा के चरणों में पहला पग : भावनाओं से भरा क्षण”
Seoni 21 June 2025
सिवनी यशो:- कपिल की परिक्रमा: ओंकारेश्वर से उठे एकाकी पग, लेकिन सैकड़ों आशीर्वादों के साथ
“कभी-कभी एक व्यक्ति अकेले चलता है, लेकिन वह अपने साथ कई हृदयों की आस्था, विश्वास और शुभकामनाएं लेकर निकलता है।”
15 नवम्बर – कार्तिक पूर्णिमा
सिवनी के श्री बालरूप हनुमान मंदिर में गूंजते शंख, जलते दीप, फूलों की सजावट और आशीर्वाद से भरे चेहरों के बीच कपिल पांडे जी माँ नर्मदा की साइकिल परिक्रमा के लिए रवाना हुए।

यह केवल एक यात्रा नहीं थी — यह उनके जीवन की सबसे आत्मिक, सबसे मौन और सबसे तीव्र साधना की शुरुआत थी।
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प्रेरणा देने वाले वे मित्र… जो साथ चले मन में
इस यात्रा की प्रेरणा कपिल पांडे ने पायी, पर इस संकल्प को आकार देने में सिवनी के कुछ आत्मीय मित्रों का विशेष स्थान रहा।
संतोष अग्रवाल -जिन्होंने इस यात्रा को “पिता की आत्मा की मुक्ति” से जोड़कर कपिल के विश्वास को गहराई दी।
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मनोज मर्दन त्रिवेदी – लेखनी और सेवा से हमेशा साथ खड़े रहे, और हर मोड़ पर कपिल के विचारों को दिशा दी।
सोम पाठक , अमित मालू , ओमप्रकाश शर्मा , विनय पाठक – जिनके शब्दों, हँसी, सलाह और मौन प्रोत्साहन ने कपिल को ये विश्वास दिया कि अकेला भी चला जा सकता है।

मंदिर प्रांगण में जब विदा का क्षण आया, तो आँखें भीग रही थीं — पर चेहरों पर संतोष था।
– वह स्मृति… जो साइकिल से अधिक मूल्यवान थी
“कपिल के साथ सिवनी के हृदय भी यात्रा पर निकले थे”
ओंकारेश्वर – पहली रात्रि का मौन संकल्प
इंदौर होते हुए कपिल ओंकारेश्वर पहुँचे।
वहाँ उन्हें मिले अजब सिंह ठाकुर — पूर्व परिक्रमावासी।
उन्होंने विस्तार से परिक्रमा की विधियाँ बताईं, एक पुस्तक दी जिसमें मार्ग, नियम और आस्था के संकेत भरे थे।
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कपिल पांडे ने उसी रात संकल्प लिया —
“अब यह यात्रा सिर्फ मेरी नहीं, यह हर उस व्यक्ति की है जिसने मुझे विदा करते समय अपने प्रेम को इस यात्रा में बाँधा है। अब पीछे नहीं देखना है।”
अगले भाग में…
“कपिल पांडे की परिक्रमा का पहला दिन — जब पहली बार पाँव ने नदी की रेत को छुआ और मन ने कहा – यही है वह मार्गज्”
“नर्मदायै नम:”



