विशाल किसान बचाओ आंदोलन : नकुलनाथ बोले - मक्का 2400 रुपए क्विंटल में खरीदा जाए, किसानों को राहत मिले
मक्का 1000–1500 रुपए क्विंटल तक गिरा, किसानों ने उचित दाम की मांग तेज की
Chhindwara 02 December 2025
छिंदवाड़ा यशो:- कुसमेली कृषि उपज मंडी में आयोजित विशाल किसान बचाओ आंदोलन में मक्का समर्थन मूल्य संकट नकुलनाथ के मुख्य सवाल के रूप में सामने आया, जहां किसानों ने मक्का के बेहद कम दामों पर बिकने को लेकर रोष व्यक्त किया।
पूर्व सांसद नकुलनाथ ने कहा कि प्रदेश में इस समय किसानों के सामने मक्का समर्थन मूल्य संकट नकुलनाथ आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। सरकार 2,400 नहीं बल्कि 3,000 रुपये प्रति क्विंटल मक्का खरीदे, क्योंकि आज मंडियों में मक्का 1000–1500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है, जो किसान की लागत से भी कम है
सरकार के दावों बनाम ज़मीनी सच्चाई – मक्का 2400 में खरीदे जाने की बात, लेकिन किसानों को मिल रहे सिर्फ 1000–1500 रुपये
नकुलनाथ ने भाषण के दौरान सरकार के ‘कथित वादों’ को चुनौती देते हुए कहा—
“सरकार दावा करती है कि मक्का 2400 रुपये क्विंटल में खरीदा जाएगा, लेकिन सच्चाई यह है कि पूरे प्रदेश में आज मक्का सिर्फ 1000–1500 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। यह किसानों के साथ खुली लूट है।”
उन्होंने कहा कि जब
✔ खाद, बीज, कीटनाशक, बिजली, मजदूरी,सब कुछ महँगा हो चुका है,
तो किसान अपनी फसल 1500 रुपये में बेचकर कैसे जिंदा रह पाएगा?
नकुलनाथ ने स्पष्ट मांग रखी कि—
“मक्का की खरीदी न्यूनतम 2400 नहीं, बल्कि अधिकतम 3000 रुपये प्रति क्विंटल तय की जाए, तभी किसान की लागत निकल पाएगी और वह घाटे से बच पाएगा।”
“किसान की मेहनत का हिसाब कोई किताब नहीं बता सकती” — नकुलनाथ
नकुलनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि किसान की असली लागत किसी किताब में दर्ज नहीं होती, वह केवल वही जान सकता है जो दिन-रात खेतों में पसीना बहाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि-
सरकार खाद नहीं दे रही, किसानों पर लाठीचार्ज करवा रही,
झूठे आश्वासन दे रही, समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं कर रही।
नकुलनाथ ने कहा—
“खाद के लिए लाइन, पुलिस की लाठियाँ, और ऊपर से लागत बढ़ती जा रही है। खेती लाभ का धंधा कैसे बनेगा?”
कपास उत्पादकों का दर्द-समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं
उन्होंने पांढुर्ना और सौंसर के कपास उत्पादक किसानों की स्थिति को भी बेहद दयनीय बताया।
सरकार कपास को समर्थन मूल्य पर नहीं खरीद रही, जिससे किसान गहरे संकट में हैं।
मक्का की लागत बनाम किसानों का घाटा – कितना नुकसान?
कृषि विशेषज्ञों व किसानों द्वारा आंदोलन में प्रस्तुत तथ्य—
-
एक हेक्टेयर मक्का उत्पादन में लागत: 27,000
-
अधिकतम संभावित उत्पादन: 20 क्विंटल
-
यदि MSP 2400 हो : 48,000 प्राप्त
-
लेकिन वर्तमान बाजार मूल्य 1000–1500 पर किसान के हाथ आते हैं
-
प्रति एकड़ घाटा: 12,000 से भी अधिक
नकुलनाथ ने कहा—
“जब दाम घटेंगे और लागत बढ़ेगी, तब खेती कैसे टिक पाएगी? सरकार जवाब दे।”
एसडीएम को सौंपा राज्यपाल के नाम ज्ञापन — ये प्रमुख मांगे रखीं
किसानों द्वारा एसडीएम को सौंपे ज्ञापन में भी स्पष्ट उल्लेख किया गया कि मक्का समर्थन मूल्य संकट नकुलनाथ आंदोलन का मुख्य आधार है –
सरकार तत्काल मक्का का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करे और वास्तविक खरीदी शुरू करे
यह भी पढ़े :- प्रदेश सरकार ने 2600 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने का निर्णय लिया
मक्का 2400 नहीं, 3000 रुपये में खरीदा जाए
सोसाइटियों में किसानों को नकद में खाद मिले,
पावती की अनिवार्यता समाप्त की जाए,
सिंचाई हेतु 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाए,
रात के बजाय दिन में सप्लाई बढ़ाई जाए,
स्थायी-अस्थायी कनेक्शन में ‘लूट’ बंद की जाए
मंडी की अव्यवस्थाओं में तत्काल सुधार
नहरों की सफाई व मरम्मत तुरंत शुरू की जाए
माइक्रो-1 और माइक्रो-2 लिफ्ट इरीगेशन का अधूरा काम पूरा हो
हम्माल और तुलइयों का पंजीयन कराया जाए
कृषि महाविद्यालय के लिए बजट जारी किया जाए
खाद की बढ़ी कीमतें वापस ली जाएँ
आज चौरई में भी होगा विशाल किसान बचाओ आंदोलन
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथके मार्गदर्शन व पूर्व सांसद नकुलनाथ के नेतृत्व में
आज 3 दिसम्बर को, सुबह 11 बजे, चौरई कम्युनिटी हॉल के सामने
एक और विशाल किसान बचाओ आंदोलन आयोजित किया जाएगा
https://www.facebook.com/TheKamalNath/posts/1470527687763869/



