सिवनी में किसके दम पर चल रहा ‘अटैचमेंट सिंडिकेट’? – हाईकोर्ट और शासन के आदेश भी बेअसर!
जिला पंचायत अध्यक्ष मालती डेहरिया का प्रशासन पर सीधा हमला, बोलीं - “आखिर नियमों को कुचल कौन रहा है?”
सिवनी अटैचमेंट सिंडिकेट – वर्षों से मलाईदार जगहों पर जमे कर्मचारी-अधिकारी, ग्रामीण क्षेत्रों में स्टाफ संकट से विकास कार्य प्रभावित
Seoni 05 June 2026
सिवनी यशो:- सिवनी जिले में वर्षों से चल रही अटैचमेंट व्यवस्था अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष मालती मुकेश डेहरिया ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा हमला बोला और सवाल उठाया कि आखिर मध्यप्रदेश शासन और हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद जिले में नियम विरुद्ध अटैचमेंट व्यवस्था किसके संरक्षण में चल रही है?
जिला पंचायत सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि जिले के कई शासकीय विभागों में अधिकारी और कर्मचारी वर्षों से मूल पदस्थापना छोड़कर अटैचमेंट के सहारे एक ही स्थान पर जमे हुए हैं।
शासन और न्यायालय द्वारा ऐसे कर्मचारियों को तत्काल मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश कई बार जारी किए जा चुके हैं, लेकिन सिवनी में इन आदेशों का पालन नहीं होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
“ग्रामीण क्षेत्र खाली, शहरों में बढ़ती भीड़”
मालती मुकेश डेहरिया ने आरोप लगाया कि जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
पंचायतों और विभागों में जरूरी काम समय पर नहीं हो पा रहे, जबकि दूसरी ओर कुछ कार्यालयों में जरूरत से ज्यादा कर्मचारी अटैचमेंट के नाम पर वर्षों से जमे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल प्रशासनिक अव्यवस्था नहीं, बल्कि शासन की मंशा और नियमों की खुली अनदेखी है। यदि कर्मचारियों की सही तैनाती हो तो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति तेज हो सकती है।
“आदेश हैं तो पालन क्यों नहीं?”
जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने कई बार जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंजली शाह को पत्र लिखकर नियम विरुद्ध अटैचमेंट समाप्त करने और संबंधित कर्मचारियों को मूल पदस्थापना पर भेजने की मांग की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब शासन और हाईकोर्ट दोनों के स्पष्ट आदेश मौजूद हैं, तब आखिर प्रशासनिक स्तर पर इतनी उदासीनता क्यों दिखाई जा रही है?
यदि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए वैध मुद्दों को भी लगातार नजरअंदाज किया जाएगा तो सुशासन और जवाबदेही केवल भाषणों तक सीमित रह जाएगी।

“यह किसी व्यक्ति नहीं, व्यवस्था का मुद्दा”
मालती मुकेश डेहरिया ने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है।
वह एक जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी की कार्यकर्ता भी हैं और पिछले चार वर्षों से जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभा रही हैं।
उनका मकसद केवल शासन के नियमों का पालन सुनिश्चित कराना और प्रशासनिक पारदर्शिता स्थापित करना है।

उच्चस्तरीय जांच और जवाबदेही तय करने की मांग
जिला पंचायत अध्यक्ष ने मांग की कि जिले के सभी शासकीय विभागों में चल रही अटैचमेंट व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर नियम विरुद्ध संलग्नीकरण समाप्त किया जाए।
साथ ही पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि शासन और न्यायालय के आदेशों का वास्तविक पालन सुनिश्चित हो सके।
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