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2047 का सपना : विकसित भारत 2047 का सपना और मुस्लिम समाज की भागीदारी जरूरी

विकसित भारत 2047 का सपना और मुस्लिम समाज की भागीदारी जरूरी
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शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल तकनीक और उद्यमिता में समान अवसर मिलने पर ही साकार होगा विकसित भारत का संकल्प

सूफी मंज़ूर रज़ा क़ादरी
राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष
लब्बैक यूथ फोर्स (आतंकवाद विरोधी संगठन)
सिवनी, मध्यप्रदेश, भारत

Seoni, 05 November 2026

सिवनी यशो:- भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के प्रत्येक नागरिक की प्रगति, समान अवसर, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी से जुड़ा व्यापक संकल्प है। आज जब भारत अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर है, तब यह विचार करना भी आवश्यक है कि देश के सभी सामाजिक वर्ग इस विकास यात्रा में किस प्रकार सहभागी बन रहे हैं। इसी संदर्भ में मुस्लिम समाज की भूमिका और उसकी भागीदारी पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता है।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए देश को लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की परिकल्पना की गई है। विश्व बैंक के आय संबंधी वर्गीकरण के अनुसार भारत अभी निम्न-मध्यम आय वाला देश है। विकसित राष्ट्र बनने के लिए प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि, औद्योगिक विस्तार, आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के व्यापक अवसर आवश्यक होंगे। यह लक्ष्य तभी हासिल हो सकता है जब विकास की गति के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी भी सुनिश्चित हो।

11 दिसंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 'विकसित भारत 2047 : युवाओं की आवाज' पहल का शुभारंभ किया था। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को विकसित भारत की परिकल्पना तय करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश था कि व्यक्तियों के विकास से ही राष्ट्र का निर्माण संभव है। शिक्षा, जीवन स्तर, व्यापार, सुरक्षा, नवाचार, उद्यमिता, डिजिटलीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्र भारत की विकास यात्रा के महत्वपूर्ण आधार बनेंगे।

शिक्षा ही विकास की सबसे मजबूत नींव

किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी शिक्षित और कुशल आबादी होती है। शिक्षा गरीबी, बेरोजगारी, अज्ञानता और सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करने का प्रभावी माध्यम है। इसलिए आवश्यक है कि देश में प्रत्येक समुदाय के बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध हों।

मुस्लिम समाज के सामने भी शिक्षा और कौशल विकास को लेकर अनेक चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल पारंपरिक स्कूलों और कॉलेजों तक सीमित नहीं होना चाहिए। व्यावसायिक शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, आईटी, स्वास्थ्य सेवाओं, उद्योग और आधुनिक व्यवसायों से जुड़े पाठ्यक्रमों तक भी युवाओं की पहुंच बढ़ानी होगी।

विकसित भारत का सपना तभी सार्थक होगा, जब समाज का कोई भी वर्ग विकास की मुख्यधारा से बाहर न रहे। अवसरों की समान उपलब्धता और शिक्षा तक व्यापक पहुंच सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक प्रगति के लिए भी अनिवार्य है।

डिजिटल इंडिया में युवाओं की भागीदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जुलाई 2015 को डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य देश में डिजिटल आधारभूत संरचना का विस्तार, सरकारी सेवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता और नागरिकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है।

आज बैंकिंग, शिक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य, सरकारी सेवाओं और रोजगार के अनेक अवसर डिजिटल माध्यमों से संचालित हो रहे हैं। ऐसे में मुस्लिम समाज के युवाओं के लिए भी डिजिटल साक्षरता, कंप्यूटर शिक्षा, साइबर तकनीक और ऑनलाइन उद्यमिता का ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डिजिटल सुविधाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक इंटरनेट, उपकरण और प्रशिक्षण की पहुंच सुनिश्चित होगी।

कौशल विकास से रोजगार और आत्मनिर्भरता

सरकार ने युवाओं को रोजगार योग्य बनाने के उद्देश्य से जुलाई 2015 में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के माध्यम से युवाओं को विभिन्न उद्योगों और रोजगारपरक क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।

इसी प्रकार पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र सहित विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण देने वाली योजनाओं के माध्यम से भी युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने की पहल की गई है।

मुस्लिम समाज के युवाओं को इन योजनाओं की जानकारी और प्रशिक्षण केंद्रों तक पहुंच दिलाना आवश्यक है। केवल सरकारी योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि उनका लाभ वास्तविक पात्र युवाओं तक पहुंच रहा है या नहीं।

स्टार्टअप और उद्यमिता में नई संभावनाएं

विकसित भारत की कल्पना को साकार करने में स्टार्टअप और उद्यमिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। नए व्यवसायों के माध्यम से रोजगार पैदा होते हैं, नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है और अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।

मुस्लिम समाज के युवाओं में भी व्यापार, तकनीक, सेवा क्षेत्र, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और डिजिटल व्यवसायों में आगे बढ़ने की व्यापक संभावनाएं हैं। आवश्यकता इस बात की है कि उन्हें वित्तीय जानकारी, बैंकिंग सुविधाओं, बाजार, प्रशिक्षण और उद्यमिता से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।

युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजन करने वाला उद्यमी बनाने की दिशा में भी प्रयास करने होंगे।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य की चुनौतियां

आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार व्यवस्था को प्रभावित करने वाली प्रमुख तकनीक होगी। केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में 10,371.92 करोड़ रुपये के बजट के साथ पांच वर्षों के लिए इंडिया एआई मिशन को मंजूरी दी थी।

इस मिशन के अंतर्गत कंप्यूटिंग क्षमता, एआई एप्लीकेशन, डेटासेट, फाउंडेशन मॉडल, भविष्य के कौशल, स्टार्टअप वित्तपोषण तथा सुरक्षित और विश्वसनीय एआई जैसे सात प्रमुख स्तंभ निर्धारित किए गए हैं।

यह पहल भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन इसके साथ यह सवाल भी जुड़ा है कि एआई से रोजगार के स्वरूप में क्या बदलाव आएंगे? क्या इससे पारंपरिक नौकरियां प्रभावित होंगी या नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे?

इस चुनौती का समाधान युवाओं को नई तकनीक का प्रशिक्षण देकर और उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करके ही संभव है। मुस्लिम समाज सहित सभी समुदायों के युवाओं को एआई, डेटा साइंस, प्रोग्रामिंग और आधुनिक तकनीकी कौशल से जोड़ना समय की मांग है।

सामुदायिक नेतृत्व भी विकास का महत्वपूर्ण आधार

विकसित भारत की यात्रा में सामुदायिक नेतृत्व की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाज के भीतर से उभरने वाला ऐसा नेतृत्व लोगों की समस्याओं को समझता है और उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करता है।

सामुदायिक नेतृत्व का उद्देश्य केवल आदेश देना नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करना, उनके अधिकारों की जानकारी देना, शिक्षा को प्रोत्साहित करना और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करना है।

मुस्लिम समाज में भी ऐसे नेतृत्व को प्रोत्साहन मिलना चाहिए, जो युवाओं को शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करे। साथ ही विभिन्न समुदायों के बीच संवाद, सहयोग और आपसी विश्वास को बढ़ावा दे।

विकसित भारत में सबकी भागीदारी जरूरी

वर्ष 2047 का विकसित भारत केवल सरकार की योजनाओं से नहीं बनेगा। इसके लिए सरकार, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।

मुस्लिम समाज को भी शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, उद्योग, प्रशासन, खेल, व्यापार और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में अपनी भागीदारी लगातार बढ़ानी होगी। वहीं सरकार और संस्थानों की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक नागरिक को आगे बढ़ने के लिए निष्पक्ष और समान अवसर उपलब्ध हों।

विकसित भारत का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब देश की प्रगति का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक समुदाय स्वयं को राष्ट्र निर्माण की इस यात्रा का महत्वपूर्ण भागीदार महसूस करे।

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