जीतू पटवारी को वीडियो कॉन्फ्रेंस में 16 सदस्यों ने दिया था एकजुटता का भरोसा, मतदान में टूट गया विश्वास; मालती डहेरिया की कुर्सी बचने के बाद प्रदेश कांग्रेस सख्त, ओमप्रकाश मरकाम की तीन सदस्यीय समिति ने जांच रिपोर्ट सौंपी
Seoni, 04 November 2026सिवनी यशो। सिवनी जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती मुकेश डहेरिया के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव जिस तरह विफल हुआ, उसने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में भूचाल ला दिया है। भाजपा समर्थित अध्यक्ष की कुर्सी बचने के पीछे कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्यों की भूमिका को लेकर उठे सवाल अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी तक पहुंच चुके हैं। इस घटनाक्रम को प्रदेश कांग्रेस ने गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी।
समिति मंगलवार, 3 नवंबर को सिवनी पहुंची और शिकायत में उठाए गए बिंदुओं पर गहन पड़ताल की। अब जांच पूरी होने और रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कार्यालय को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में आए कांग्रेस समर्थित चार जिला पंचायत सदस्यों और एक कांग्रेस नेता पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना है। राजनीतिक चर्चाओं में तो यहां तक कहा जा रहा है कि मामला पार्टी से निष्कासन तक पहुंच सकता है।नक्शे देखें
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को दिया था 16 सदस्यों ने एकजुटता का भरोसा, फिर कैसे टूट गया विश्वास?
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जब जिला पंचायत अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने पर सहमति बनी थी, तब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले सभी 16 सदस्यों से सीधे चर्चा की थी। बताया जाता है कि इस बातचीत के दौरान सभी सदस्यों ने प्रदेश अध्यक्ष को भरोसा दिलाया था कि वे एकजुट रहेंगे और अविश्वास प्रस्ताव को पारित कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ मतदान करेंगे।समाचार पढ़ें
प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष सदस्यों द्वारा दिया गया यह सामूहिक भरोसा कांग्रेस की रणनीति का आधार माना जा रहा था। लेकिन मतदान के परिणाम ने इस भरोसे को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। जिस एकजुटता के भरोसे कांग्रेस ने जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी बदलने की उम्मीद की थी, वह मतदान के समय परिणाम में तब्दील नहीं हो सकी।
यही वजह है कि इस घटनाक्रम को अब केवल जिला पंचायत में राजनीतिक हार के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि प्रदेश नेतृत्व को दिए गए भरोसे और संगठनात्मक अनुशासन से जुड़े गंभीर मामले के रूप में भी लिया जा रहा है। राजनीतिक दृष्टि से यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण बन गया है कि प्रदेश अध्यक्ष से एकजुटता का वादा करने वाले सदस्यों के बीच आखिर ऐसा क्या हुआ कि अविश्वास प्रस्ताव ही विफल हो गया?
प्रदेश कांग्रेस ने बनाई थी तीन सदस्यीय जांच समिति
जिला पंचायत में कांग्रेस समर्थित दो सदस्यों द्वारा सिवनी जिला कांग्रेस अध्यक्ष नरेश मरावी को इस पूरे घटनाक्रम को लेकर शिकायत की गई थी। शिकायत में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस समर्थित सदस्यों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।नक्शे देखें
जिला कांग्रेस ने शिकायत को प्रदेश कांग्रेस कमेटी तक पहुंचाते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश मांगे थे। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की।
इस समिति में राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं डिंडोरी विधायक ओमप्रकाश मरकाम, पूर्व विधायक विनय सक्सेना तथा नरसिंहपुर के पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मैथिलीशरण तिवारी को शामिल किया गया था। समिति को शिकायत में उल्लेखित तथ्यों और अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सामने आए घटनाक्रम की जांच का दायित्व सौंपा गया था।कानून पढ़ें
चार सदस्य और एक कांग्रेस नेता की भूमिका संदिग्ध!
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आ रही है कि शिकायत में चार कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्यों के साथ एक कांग्रेस नेता की भूमिका को भी संदिग्ध बताया गया है। शिकायत के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव को विफल करने और अध्यक्ष मालती डहेरिया की कुर्सी बचाने में इनकी भूमिका की पड़ताल की जानी थी।
मंगलवार को सिवनी पहुंची जांच समिति ने शिकायत के विभिन्न बिंदुओं पर संबंधित पहलुओं की पड़ताल की। बताया जाता है कि जांचकर्ताओं ने सदस्यों की भूमिका, राजनीतिक घटनाक्रम और अविश्वास प्रस्ताव के दौरान हुए घटनाक्रम को समझने के लिए विभिन्न स्तरों पर चर्चा की।
जिला कांग्रेस कार्यालय में रही गहमागहमी, समिति के पहुंचते ही बढ़ी हलचल
जांच समिति के सिवनी पहुंचने की जानकारी मिलते ही जिला कांग्रेस कार्यालय और स्थानीय राजनीतिक हलकों में गहमागहमी बढ़ गई। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर उत्सुकता और बेचैनी रही कि जांच समिति किन लोगों से चर्चा करेगी और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर उसका क्या निष्कर्ष होगा।
दैनिक यशोन्नति के कांग्रेस मामलों को कवर करने वाले संवाददाता ने पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखते हुए संभावित संगठनात्मक कार्रवाई की जानकारी जुटाई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांचकर्ताओं ने अविश्वास प्रस्ताव को विफल करने में सहयोग करने के आरोपों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया और अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय को प्रेषित कर दी है।
चार सदस्य और एक नेता पर कठोर कार्रवाई के संकेत, निष्कासन भी संभव!
जांच रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय पहुंचने के बाद अब संगठनात्मक कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, जांच के निष्कर्षों के आधार पर चार कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्यों और एक कांग्रेस नेता के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
संभावना यह भी व्यक्त की जा रही है कि यदि प्रदेश नेतृत्व जांच में सामने आए तथ्यों को गंभीर अनुशासनहीनता मानता है तो संबंधित लोगों को पार्टी से निष्कासित करने जैसा निर्णय भी लिया जा सकता है। हालांकि, अभी तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से किसी कार्रवाई या निष्कासन का आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है। अंतिम निर्णय सक्षम संगठनात्मक नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा।
16 सदस्यों के समर्थन के दावे के बावजूद कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव औंधे मुंह गिरा
जिला पंचायत अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव के समय कांग्रेस के 11 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पांच सदस्यों के समर्थन का दावा राजनीतिक चर्चा में था। इस तरह विपक्ष के पास 16 सदस्यों का आंकड़ा बताया जा रहा था, जबकि भाजपा के तीन सदस्य बताए गए थे। इसके बावजूद अविश्वास प्रस्ताव विफल हो गया और मालती डहेरिया अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहीं।
इस अप्रत्याशित परिणाम ने कांग्रेस के राजनीतिक दावों और संगठनात्मक समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए। विशेष बात यह है कि जिन 16 सदस्यों की एकजुटता को लेकर प्रदेश अध्यक्ष को भरोसा दिया गया था, उसी राजनीतिक समीकरण का परिणाम के समय बिखर जाना अब जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
अब प्रदेश नेतृत्व के फैसले का इंतजार
सिवनी जिला पंचायत का यह घटनाक्रम अब कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। एक ओर जिला पंचायत अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव की विफलता है, तो दूसरी ओर पार्टी के भीतर संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी की चर्चाएं हैं। तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय पहुंचने के बाद अब निगाहें कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व पर टिकी हैं।
दैनिक यशोन्नति का राजनीतिक विश्लेषण: जिला पंचायत में संख्या बल के दावों के बावजूद अविश्वास प्रस्ताव का गिरना कांग्रेस के लिए केवल एक राजनीतिक पराजय नहीं, बल्कि संगठन के भीतर विश्वास और एकजुटता की परीक्षा बन गया है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के सामने सभी 16 सदस्यों द्वारा एकजुट रहने का भरोसा दिया जाना और उसके बाद अविश्वास प्रस्ताव का विफल होना इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बनाता है।
अब कांग्रेस नेतृत्व के सामने चुनौती है कि वह आरोपों की निष्पक्ष जांच के आधार पर जवाबदेही तय करे। यदि चार जिला पंचायत सदस्यों और एक कांग्रेस नेता पर निष्कासन की कार्रवाई होती है, तो यह सिवनी कांग्रेस की राजनीति में बड़ा संगठनात्मक घटनाक्रम होगा।
दैनिक यशोन्नति की पड़ताल जारी है। जांच समिति में शामिल नेताओं की सिवनी में हुई गतिविधियों, जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और प्रदेश कांग्रेस के आगामी फैसले से जुड़ी विस्तृत जानकारी शीघ्र ही पाठकों के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।