एम.पी.आर.डी.सी. की बेसशर्मी पर जनता का प्रहार – सड़क के गड्ढों में रोपे ‘बेशरम’ के पौधे!
सिवनी–मंडला मार्ग की जर्जर हालत से त्रस्त नागरिकों ने प्रशासन की अनदेखी पर जताया तीखा व्यंग्य -“शायद बेशरम के पौधे ही विभाग की बेशरमी को जगा दें।”
Seoni 03 November 2025
सिवनी यशो:- मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड (एम.पी.आर.डी.सी.) की लापरवाही और अधूरे निर्माण कार्यों से तंग आकर ग्रामीणों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। ग्राम क्षेत्र में महीनों से अधूरी सड़क, उखड़ा डामर और धूल–धक्कड़ से परेशान लोगों ने विभाग की बेसशर्मी के प्रतीक के रूप में सड़क किनारे ‘बेशर्म’ के पौधे रोप दिए।
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग के अधिकारी शिकायतों पर ध्यान नहीं देते,
इसलिए अब सड़क की हालत को देख यह नाम ‘बेशर्म रोड’ रखना ही उचित होगा।
इस घटना ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है और लोगों ने सोशल मीडिया पर भी एम.पी.आर.डी.सी. की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
सिवनी–मंडला मार्ग की जर्जर हालत ने अब जनआक्रोश का रूप ले लिया है। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड (एम.पी.आर.डी.सी.) की लगातार अनदेखी के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता स्वप्निल उपाध्याय और साथी पत्रकारों ने 3 नवम्बर को सड़क के गड्ढों में “बेशरम” के पौधे लगाकर अनोखा विरोध दर्ज कराया।
यह व्यंग्यात्मक प्रदर्शन प्रशासन की उस “बेशरमी” पर तीखा तंज है, जो पिछले एक वर्ष से नागरिकों की पीड़ा सुनने के बावजूद मौन बनी हुई है।
“हादसों को न्योता दे रही है यह सड़क”
स्वप्निल उपाध्याय ने कहा —
“सड़क की यह स्थिति किसी भी दिन जानलेवा साबित हो सकती है। हमने बार-बार शिकायत की, पर नतीजा सिफर रहा। अब प्रतीकात्मक विरोध से शायद जिम्मेदार जाग जाएँ।”
सड़क या गड्ढों का जंगल?
कान्हीवाड़ा से नैनपुर तक सड़क की हालत इतनी भयावह है कि लोग मजाक में कहते हैं — “यह सड़क में गड्ढे नहीं, बल्कि गड्ढों में सड़क है।”
दैनिक दुर्घटनाओं और चोटों के बावजूद अब तक न मरम्मत हुई, न पुनर्निर्माण।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सिर्फ गड्ढे भरना पर्याप्त नहीं, इस मार्ग का पुनर्निर्माण और चौड़ीकरण ही स्थायी समाधान है।
पर्यटन की छवि पर भी असर
यह मार्ग केवल सिवनी और मंडला जिलों को नहीं जोड़ता,
बल्कि पेंच और कान्हा राष्ट्रीय उद्यानों के बीच का मुख्य संपर्क मार्ग है।
देश-विदेश से आने वाले सैकड़ों पर्यटक इसी रास्ते से गुजरते हैं।
ऐसे में सड़क की बदहाल स्थिति मध्यप्रदेश की पर्यटन छवि पर धब्बा बन गई है।
हादसे की याद आज भी ताज़ा
इसी मार्ग पर धानागाढ़ा के पास पिछले वर्ष एक बड़ा सड़क हादसा हुआ था।
मंडला निवासी कपड़ा व्यापारी जसवानी परिवार नागपुर से इलाज कराकर लौट रहा था,
जब उनकी कार एसएएफ जवानों से भरी बस से टकरा गई।
इस दुर्घटना में परिवार के दो सदस्यों और ड्राइवर की दर्दनाक मौत हो गई थी।
जिम्मेदार मौन, जनता त्रस्त
स्थानीय लोगों का कहना है कि

मंत्री,
सांसद,
विधायक और
अधिकारी रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं, पर कोई भी सड़क सुधार की पहल नहीं करता।
अब आमजन कहने लगे हैं —
“शायद बेशरम के पौधे ही प्रशासन की बेशरमी को जगा दें!”



