मंडलामध्यप्रदेश

“मंडला वनमंडल में दहशत का राज!” - वनमंडल अधिकारी पर कर्मचारियों को ‘चोर’ कहने, मानसिक प्रताड़ना और लक्ष्य आतंक के गंभीर आरोप

स्थानांतरण नहीं हुआ तो विदोहन ठप ! वनकर्मियों ने चेताया— प्रताड़ना से किसी भी दिन हो सकती है अप्रिय घटना

 Mandla December 18, 2025
मंडला यशो: – उत्पादन वनमंडल मंडला में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों का सब्र अब जवाब दे चुका है। मंडला उत्पादन वनमंडल अधिकारी की कथित दमनकारी कार्यशैली, अपमानजनक भाषा, अव्यवहारिक लक्ष्य और मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ कर्मचारियों ने कार्य बंद आंदोलन की औपचारिक चेतावनी जारी कर दी है। कर्मचारियों ने साफ कहा है कि यदि एक सप्ताह के भीतर समाधान नहीं हुआ, तो समस्त विदोहन कार्य ठप कर दिए जाएंगे।

इस संबंध में कर्मचारियों द्वारा वनसंरक्षक, मध्य वन वृत्त जबलपुर को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा गया है, जिसमें 22 बिंदुओं में विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।

“चोर”, “शासन का पैसा खाने वाले” जैसे शब्दों से अपमान का आरोप

कर्मचारियों का आरोप है कि विभागीय बैठकों, फील्ड दौरे और व्यक्तिगत मुलाकातों के दौरान अधिकारियों व कर्मचारियों को “चोर”, “शासन का पैसा खाने वाले” जैसे अपशब्दों से संबोधित किया जाता है।
योग्यता पर सवाल उठाकर नौकरी से हटाने या त्यागपत्र देने का दबाव भी बनाए जाने की बात सामने आई है।

मोबाइल जांच से निजता पर हमला!

शिकायत में कहा गया है कि समीक्षा बैठकों और दौरे के दौरान कर्मचारियों से मोबाइल लेकर अकारण जांच की जाती है, जिससे उनकी व्यक्तिगत व पारिवारिक गोपनीयता भंग होती है। कर्मचारियों ने इसे नियम विरुद्ध बताते हुए इसे आत्मसम्मान पर चोट करार दिया है।

असंभव लक्ष्य, श्रमिकों की कमी और मानसिक तनाव

दिसंबर 2025 तक कूपों में 50% वृक्ष कटाई, लॉगिंग और थप्पीकरण का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि अनुमति में देरी और मजदूरों के पलायन के कारण श्रमिकों का भारी अभाव है।
इसके बावजूद गूगल शीट के माध्यम से साप्ताहिक समीक्षा कर कूप प्रभारियों पर अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है, जिससे उनका मानसिक संतुलन और कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।

मंडला उत्पादन वनमंडल कर्मचारियों का ज्ञापन, वनमंडल अधिकारी पर प्रताड़ना के आरोप
मंडला वनमंडल में बवाल: कर्मचारियों पर प्रताड़ना के आरोप, कार्य बंद आंदोलन की चेतावनी

भुगतान अटका, मजदूर परेशान

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि—

  • प्रमाणकों का भुगतान समय पर नहीं हो रहा

  • मजदूरों को आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा

  • सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें बंद कराने का दबाव बनाया जाता है

  • स्वयं के वेतन से भुगतान करने के लिए प्रेरित किया जाता है

वहीं टीए-डीए, एरियर और डिपो नीलामी से जुड़े भुगतान भी लंबित बताए गए हैं।

डांटना, चिल्लाना, स्पष्टीकरण—दहशत का माहौल

शिकायत पत्र में कहा गया है कि—

  • फोन पर भी सामान्य बातचीत में तेज आवाज और डांट

  • छोटी-छोटी बातों पर स्पष्टीकरण जारी

  • फील्ड दौरे में अमानवीय व्यवहार और चिल्लाना

  • छुट्टी मांगने पर मना करना, तय समय से अधिक काम कराना

इन सबके कारण कर्मचारी मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से हतोत्साहित हैं।

जनहानि की चेतावनी, स्थानांतरण की मांग

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ तो किसी भी अप्रिय या जनहानि की घटना से इंकार नहीं किया जा सकता, जिसकी जिम्मेदारी वनमंडल अधिकारी पर होगी।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि—

एक सप्ताह के भीतर वनमंडल अधिकारी का स्थानांतरण नहीं हुआ, तो समस्त क्षेत्रीय कर्मचारी विदोहन कार्य छोड़कर सामूहिक हड़ताल पर जाने को विवश होंगे।

उच्च स्तर तक शिकायत

इस शिकायत की प्रतिलिपि—

को भी सूचनार्थ भेजी गई है।

दैनिक यशोन्नति विशेष

यह मामला केवल विभागीय असंतोष का नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता, कर्मचारियों के अधिकार और वन विभाग की कार्य संस्कृति से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। अब निगाहें शासन और वन मुख्यालय के निर्णय पर टिकी हैं।

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