“क्या सनातन धर्म जातिवादी है? हिंदू सम्मेलन में हुआ खुला विचार-मंथन”
हमारे धर्मग्रंथों में जाति जैसी व्यवस्था का कोई उल्लेख नहीं – पं. राजेंद्र प्रसाद पांडे
सिवनी यशो :- हमारे धर्मग्रंथों में जाति जैसी किसी व्यवस्था का उल्लेख नहीं है।
हिंदुत्व एक जीवन पद्धति है, जो शाश्वत है और सनातन धर्म
सबकी भलाई व कल्याण का वाहक है। प्रत्येक प्राणी का दूसरे प्राणियों से अटूट संबंध है।
सत्य एक है, जिसे बुद्धिमान लोग अनेक प्रकार से कहते हैं। लक्ष्य एक है,
लेकिन उसे प्राप्त करने के मार्ग अनेक हैं।

उक्त विचार पं. राजेंद्र प्रसाद पांडे ने
राजपूत कॉलोनी स्थित शिव शक्ति मंदिर परिसर में
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित
विशाल हिंदू सम्मेलन में उपस्थित सनातनी जनसमुदाय को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
हमारी संस्कृति हमारी परंपराओं से सुरक्षित
पं. पांडे ने कहा कि –
हजारों वर्षों के आक्रमणों और कुचक्रों के बावजूद
यदि हमारी संस्कृति सुरक्षित है, तो इसका कारण हमारी
प्राचीन सनातन परंपराएं हैं, जिन्होंने सभ्यता और संस्कृति को बचाए रखा।
गौ, तुलसी, भारत माता व कन्या पूजन के साथ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ गौ माता, तुलसी माता, भारत माता एवं कन्या पूजन
के साथ दीप प्रज्ज्वलन द्वारा किया गया।

सनातन धर्म विज्ञान के साथ कदम मिलाकर चलता है – श्रीमती लता ऐलकर
कार्यक्रम में वक्ता के रूप में बालाघाट से पधारी समाजसेवी एवं शिक्षाविद
श्रीमती लता ऐलकर ने सनातन धर्म के
अवतारवाद की तुलना डार्विन के विकासवाद से करते हुए
सनातन को एक वैज्ञानिक धर्म सिद्ध किया।
उन्होंने जल संरक्षण, वृक्षारोपण एवं प्लास्टिक के उपयोग को बंद करने का आह्वान किया।
साथ ही नारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि नारी ही परिवार की
संस्कार वाहक, संरक्षक और शक्ति है – वह लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा तीनों है।
उन्होंने मातृशक्ति से आग्रह किया कि भाषा, वेशभूषा, स्वदेशी जीवनशैली,
भोजन-भजन-भवन-भ्रमण के माध्यम से परिवार को संस्कारित करें और
बच्चों को अपनी मूल पूजा पद्धति से परिचित कराएं।
संघ की भूमिका पर प्रकाश
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग सहकार्यवाह विक्रांत साकुरे ने
संघ निर्माण की पृष्ठभूमि, हिंदू संगठन और राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वहीं गीता रामायण प्रचारक संस्थान, नर्मदापुरम के संस्थापक
जगदीश प्रसाद मालवीय ने कहा कि आज के समय में
हिंदुओं का संगठित होना सबसे बड़ी आवश्यकता है।

समाज के लिए विशिष्ट योगदान देने वाले नागरिकों का सम्मान
कार्यक्रम में समाज एवं राष्ट्र के लिए उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों का सम्मान किया गया।
- देवेंद्र वर्मा – एयरफोर्स से मास्टर वारंट ऑफिसर के रूप में सेवानिवृत्त
- देवेंद्र ठाकुर – राष्ट्रीय हॉकी अंपायर,
थाईलैंड अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में एक स्वर्ण व एक रजत पदक - कु. अवनी अरुण चौरसिया – राज्य स्तरीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रजत पदक
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
आमगांव से आई शैला नृत्य पार्टी एवं
सरस्वती शिशु मंदिर की छात्राओं द्वारा प्रेरणादायक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।
स्थानीय गायिका श्रीमती श्रद्धा साहू ने
देशभक्ति गीत “जहां डाल-डाल में सोने की…” प्रस्तुत कर वातावरण को भावविभोर कर दिया।
वंदे मातरम् व भारत माता आरती के साथ समापन
कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम्, भारत माता की सामूहिक आरती एवं
महाप्रसाद सहभोज के साथ हुआ, जिसमें समरसता के साथ सभी परिवारों ने सहभागिता की।
आयोजन समिति संयोजक दिलीप नेमा, सहसंयोजक
कन्हैया नाविक,
संरक्षक अरविंद गर्वे
एवं महिला संयोजिका श्रीमती सीमा गौर ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक भावपूर्ण प्रस्तुति
आयोजित इस विशाल हिंदू सम्मेलन के दौरान सरस्वती शिशु मंदिर, सिवनी के भैया-बहिनों द्वारा राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। देशभक्ति गीतों और अनुशासित मंचीय प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रमों को श्रोताओं ने मुक्तकंठ से सराहा, वहीं बच्चों की प्रस्तुति ने सम्मेलन के वातावरण को राष्ट्रप्रेम और संस्कारों से ओतप्रोत कर दिया।




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