उद्घाटन से पहले 9.47 करोड़ के पुल पर उठे सवाल, ग्रामीण बोले—पहले जांच, फिर उद्घाटन
150 मीटर हिस्से में करीब 5 फीट कम चौड़ाई का दावा, जगह-जगह क्रेक ने बढ़ाई चिंता
सिवनी में 9.47 करोड़ के पुल पर सवाल, कम चौड़ाई और क्रेक की शिकायत
Seoni, 29 September 2026
सिवनी यशो:- बरघाट विकासखंड के साल्हेकला क्षेत्र में जेवनारा-धपारा (गंगेरूआ) मार्ग पर हिर्री नदी में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बन रहे करीब ₹9 करोड़ 47 लाख के हाईलेवल सबमर्सिबल पुल को लेकर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस पुल में पिचिंग का काम अधूरा है, करीब 150 मीटर हिस्से में सड़क की चौड़ाई निर्धारित माप से लगभग 5 फीट कम दिखाई दे रही है और पुल के कुछ हिस्सों में जगह-जगह क्रेक नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इन बिंदुओं को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन अब तक ऐसी व्यापक तकनीकी जांच सामने नहीं आई है, जिससे शिकायतों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। यही वजह है कि अब ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग तेज कर दी है।

करोड़ों का पुल, लेकिन पिचिंग अधूरी होने का आरोप
पुल के दोनों ओर नदी के किनारों की सुरक्षा के लिए की जा रही पिचिंग को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि कई स्थानों पर पत्थरों की जमावट असमान और अधूरी दिखाई दे रही है।
बारिश और नदी के तेज बहाव वाले क्षेत्र में पिचिंग की मजबूती बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि यदि पिचिंग में कोई तकनीकी कमी है तो उसे पुल के उद्घाटन से पहले ही दुरुस्त क्यों नहीं किया जा रहा?
हालांकि पिचिंग निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप है अथवा नहीं, इसका अंतिम फैसला तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा मौके पर निरीक्षण और माप के बाद ही हो सकता है।
150 मीटर में 5 फीट कम चौड़ाई का दावा, मौके पर माप की मांग
पुल से जुड़े हिस्से में सड़क की चौड़ाई को लेकर ग्रामीणों ने सबसे गंभीर सवाल उठाया है। उनका दावा है कि करीब 150 मीटर लंबे हिस्से में सड़क निर्धारित चौड़ाई से लगभग 5 फीट तक कम दिखाई दे रही है।
यदि स्वीकृत डिजाइन और वास्तविक निर्माण की चौड़ाई में इतना अंतर है तो मामला सीधे सड़क की सुरक्षा और आवागमन से जुड़ जाता है।
ग्रामीणों की मांग है कि विभाग मौके पर टेप से वास्तविक चौड़ाई नापे, उसे स्वीकृत ड्राइंग एवं तकनीकी मापदंड से मिलाए और जांच का परिणाम सार्वजनिक करे।
सवाल सीधा है—यदि चौड़ाई सही है तो मौके पर माप कराने में आपत्ति क्यों?
पुल के किनारे कंक्रीट के खंभों पर भी सवाल
पुल के दोनों ओर लगाए गए कंक्रीट के खंभों की स्थिति को लेकर भी ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। ग्रामीणों के अनुसार कुछ स्थानों पर खंभों की फिनिशिंग, ऊंचाई, दूरी और स्थापना को लेकर सवाल दिखाई देते हैं।
इस मार्ग से भविष्य में छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होना है। ऐसे में पुल की सुरक्षा व्यवस्था में मामूली कमी भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। इसलिए ग्रामीण प्रत्येक खंभे की मजबूती और तकनीकी मानकों के अनुरूप स्थापना की जांच की मांग कर रहे हैं।
क्योरिंग पर सवाल, पुल में क्रेक ने बढ़ाई चिंता
निर्माण में तराई यानी क्योरिंग को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पर्याप्त क्योरिंग नहीं होने के कारण कुछ हिस्सों में क्रेक दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि क्रेक का वास्तविक कारण क्या है—क्योरिंग, निर्माण सामग्री, तापमान, डिजाइन, भार अथवा कोई अन्य तकनीकी वजह—यह विशेषज्ञ जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।
लेकिन ग्रामीणों का तर्क है कि ₹9.47 करोड़ की परियोजना में दिखाई देने वाले क्रेक को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी तकनीकी जांच जरूरी है।
एप्रोच रोड पर तेजी, पहले पुल की जांच क्यों नहीं?
एक तरफ पुल की पिचिंग, चौड़ाई, खंभों और क्रेक को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एप्रोच रोड और रिंग रोड की लेवलिंग का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन निर्माण हिस्सों पर सवाल उठ चुके हैं, उनका पहले परीक्षण कराया जाना चाहिए। यदि कोई कमी मिलती है तो उसे सुधारने के बाद ही अंतिम कार्य पूरा किया जाए।
उद्घाटन हुआ तो मौके पर अधिकारियों के सामने रखेंगे आपत्ति
ग्रामीणों को पुल के जल्द उद्घाटन की संभावना की जानकारी मिली है। इसे लेकर उन्होंने दो टूक कहा है कि बिना तकनीकी जांच और आवश्यक सुधार के उद्घाटन नहीं होना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि उद्घाटन से पहले उनकी शिकायतों की जांच नहीं हुई और पुल का उद्घाटन किया गया, तो वे मौके पर ही संबंधित अधिकारियों के सामने सड़क की चौड़ाई, पिचिंग, क्रेक, खंभों और अन्य तकनीकी बिंदुओं से जुड़ी अपनी आपत्तियां रखेंगे।
कागजी जांच नहीं, मौके पर हो फैसला
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई छोटा निर्माण कार्य नहीं, बल्कि करीब ₹9.47 करोड़ की सार्वजनिक धनराशि से तैयार हो रही महत्वपूर्ण परियोजना है। इसलिए निर्माण से जुड़े सवालों का जवाब फाइलों में नहीं, बल्कि मौके पर वास्तविक माप और तकनीकी परीक्षण से मिलना चाहिए।
यदि निर्माण स्वीकृत मापदंडों के अनुसार हुआ है तो विभाग तकनीकी जांच कराकर स्थिति साफ कर सकता है। और यदि कहीं कमी सामने आती है तो उद्घाटन से पहले सुधार कराया जाना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल—जांच से आखिर परहेज क्यों?
जब ग्रामीण लगातार शिकायत कर रहे हैं, सड़क की चौड़ाई से लेकर पिचिंग, खंभों और क्रेक तक पर सवाल उठ रहे हैं, तो व्यापक तकनीकी जांच कब होगी?
ग्रामीणों की मांग साफ है—पहले जांच, फिर सुधार और उसके बाद उद्घाटन।
क्योंकि पुल का उद्घाटन एक दिन का कार्यक्रम होगा, लेकिन उसकी मजबूती, गुणवत्ता और सुरक्षा का असर आने वाले वर्षों तक हजारों लोगों के आवागमन पर पड़ेगा। इसलिए अब निगाहें संबंधित विभाग की तकनीकी जांच और उसके निष्कर्ष पर टिकी हैं।
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