बिजली की चिंगारी ने बर्बाद किया किसान! 4 एकड़ फसल मिनटों में राख
जर्जर तार, बिना अर्थिंग के सब-स्टेशन और कागजी सुधार—किसान की मेहनत बनी राख
बिजली विभाग की लापरवाही से फसल जली 4 एकड़ जलकर राख
Seoni 12 April 2026
सिवनी / कान्हीवाड़ा यशो:- बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही एक बार फिर किसानों पर भारी पड़ गई। मठियाटोला निवासी किसान मानसिंह कंगाली की लगभग 4 एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल शॉर्ट सर्किट से लगी भीषण आग में जलकर पूरी तरह राख हो गई। बिजली विभाग की लापरवाही से फसल जली यह हादसा उस व्यवस्था की पोल खोलता है, जो वर्षों से “मेंटेनेंस” के नाम पर सिर्फ कागजों में चल रही है।

“तारों में चिंगारी, खेत में तबाही”
ग्रामीणों के अनुसार खेत के ऊपर से गुजर रहे जर्जर विद्युत तारों में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ और चिंगारी ने देखते ही देखते पूरी फसल को अपनी चपेट में ले लिया।
किसान मानसिंह अपनी आंखों के सामने महीनों की मेहनत को जलते हुए देखता रहा—न कोई सुरक्षा, न कोई पूर्व चेतावनी।
मेंटेनेंस पर बड़ा सवाल: क्या सिर्फ कागजों में हो रहा सुधार?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग नियमित मेंटेनेंस का दावा करता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।
क्षेत्र के कई सब-स्टेशनों की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है।
यह सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी है, जिसका खामियाजा अब किसान भुगत रहे हैं।
देर से जागा सिस्टम, तब तक सब खत्म
बिजली विभाग की लापरवाही से फसल जली घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक पूरी फसल जल चुकी थी। स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू पाया गया, पर नुकसान अकल्पनीय हो चुका था।

“हर साल वही कहानी”—ग्रामीणों में उबाल
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। हर साल जर्जर तारों और लापरवाही के कारण इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर कभी ठोस कार्रवाई नहीं होती।
मुआवजा ही नहीं, जिम्मेदारी तय हो
पीड़ित किसान के लिए मुआवजे की मांग तो उठ ही रही है, लेकिन अब ग्रामीणों ने साफ कहा है:
- केवल मुआवजा नहीं, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
- जर्जर तारों को तत्काल बदला जाए
- सब-स्टेशनों की व्यवस्था दुरुस्त की जाए
- नियमित और वास्तविक मेंटेनेंस सुनिश्चित हो
बड़ा सवाल
क्या बिजली विभाग की “कागजी व्यवस्था” यूं ही किसानों की मेहनत जलाती रहेगी?
क्या बिना अर्थिंग और जर्जर तारों पर कोई जवाबदेही तय होगी?


