23 किसानों से 5,500-5,500 रुपये लेने का मामला जांच में आया सामने, कार्यपालन यंत्री राधेश्याम डाबर ने महिपाल पर कार्रवाई की पुष्टि की; एफआईआर के बजाय केवल नौकरी से हटाने तक सिमटी कार्रवाई? ईमानदार कर्मचारी धर्मेंद्र डहरवाल के तबादले पर भी उठे सवाल
Seoni, 05 November 2026
सिवनी यशो:- किसानों को सस्ती बिजली और आसान कनेक्शन देने के सरकारी दावों के बीच कुरई विद्युत वितरण केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। टुरिया क्षेत्र में अस्थायी विद्युत कनेक्शन के नाम पर किसानों से 5,500-5,500 रुपये बिना रसीद वसूलने, अवैध कनेक्शन चालू कराने और कुछ रिसॉर्टों में कथित बिजली चोरी कराने के आरोपों ने विभागीय व्यवस्था की पोल खोलने जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।
इस मामले में विभागीय जांच हुई, हेल्पर महिपाल नागोत्रा को दोषी पाए जाने की जानकारी सामने आई और कार्यपालन यंत्री राधेश्याम डाबर ने उसके विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी भी दी है। बताया गया है कि महिपाल को विभागीय काम से हटा दिया गया है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या किसानों से कथित अवैध वसूली और बिजली चोरी जैसे गंभीर मामले में कार्रवाई का दायरा केवल एक आउटसोर्स कर्मचारी तक ही सीमित रहेगा? क्या कुरई विद्युत वितरण केंद्र का पूरा काम आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया गया है? यदि एक हेल्पर खुलेआम किसानों से हजारों रुपये लेकर कनेक्शन चालू करा रहा था, तो संबंधित जेई और जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी क्या कर रहे थे? उनकी भूमिका की जांच और उन पर कार्रवाई कब होगी?
23 ग्रामीणों ने जांच टीम को बताई 5,500 रुपये देने की बात
उल्लेखनीय है कि पिछले माह जिला स्तरीय जांच दल ने कुरई विद्युत वितरण केंद्र के अंतर्गत नीमटोला, कोहका और टुरिया क्षेत्र में जांच की थी। इस दौरान 23 विद्युत कनेक्शन अवैध पाए जाने की जानकारी सामने आई थी। जांच टीम द्वारा संबंधित उपभोक्ताओं से पूछताछ किए जाने पर ग्रामीणों ने बताया था कि उन्होंने अस्थायी विद्युत कनेक्शन के लिए क्षेत्र में कार्यरत हेल्पर महिपाल नागोत्रा को 5,500-5,500 रुपये दिए थे। ग्रामीणों के अनुसार उन्हें कोई रसीद नहीं दी गई और बिजली लाइन को पोल से जोड़कर चालू कर दिया गया।
इन 23 ग्रामीणों के कथित बयानों के आधार पर कुल 1 लाख 26 हजार 500 रुपये की वसूली का मामला सामने आया था। सवाल यह है कि यदि कनेक्शन के नाम पर राशि ली गई थी तो वह विभाग के राजस्व खाते में कहां जमा हुई? उपभोक्ताओं को रसीद क्यों नहीं दी गई? और बिना अधिकृत प्रक्रिया के बिजली कनेक्शन किसकी जानकारी अथवा अनुमति से चालू किए गए?
कोटवार से 12 हजार रुपये, ऊपर से 17 हजार का जुर्माना!
मामले में ग्राम टुरिया के कोटवार से भी कनेक्शन देने के नाम पर 12 हजार रुपये लेने का आरोप सामने आया था। बताया गया कि जांच दल ने संबंधित कनेक्शन को अवैध मानते हुए 17 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। कोटवार ने भी कथित तौर पर जांच टीम को बताया कि उसने कनेक्शन के लिए महिपाल को राशि दी थी। यदि यह तथ्य जांच अभिलेखों में दर्ज है तो यह केवल अनियमितता नहीं, बल्कि उपभोक्ता से कथित तौर पर राशि लेने और विभागीय राजस्व को नुकसान पहुंचने का गंभीर मामला है।
रिसॉर्टों में भी बिजली चोरी कराने के आरोप, जांच का दायरा बढ़ाना जरूरी
इस प्रकरण में एक और गंभीर जानकारी सामने आ रही है। बताया जाता है कि टुरिया क्षेत्र में स्थित कुछ रिसॉर्टों में भी कथित तौर पर महिपाल के माध्यम से बिजली चोरी कराई जा रही थी। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो मामला किसानों से कथित वसूली से कहीं आगे बढ़कर विभागीय राजस्व को नुकसान पहुंचाने का हो सकता है। ऐसे में संबंधित रिसॉर्टों के बिजली कनेक्शन, मीटर, स्वीकृत लोड, विद्युत आपूर्ति और निरीक्षण अभिलेखों की जांच क्यों नहीं कराई जा रही? क्या विभाग इस पहलू पर भी जांच करने को तैयार है?
कार्यपालन यंत्री राधेश्याम डाबर ने बताई कार्रवाई, लेकिन एफआईआर कहां?
इस मामले में कार्यपालन यंत्री राधेश्याम डाबर द्वारा विभागीय जांच और महिपाल के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी दी गई है। उनके अनुसार महिपाल को विभागीय काम से हटा दिया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि मामला विभाग के संज्ञान में आया और जांच के बाद कार्रवाई भी हुई। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल कार्रवाई की प्रकृति और उसकी पर्याप्तता को लेकर है।
यदि किसानों से कनेक्शन के नाम पर बिना रसीद हजारों रुपये लिए गए, राशि विभाग के खाते में जमा नहीं हुई और अवैध कनेक्शन चालू कराए गए, तो क्या यह केवल आउटसोर्स कर्मचारी को काम से हटाने भर का मामला है? कथित वसूली और अमानत में खयानत के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की दिशा में क्या कदम उठाए गए? क्या किसानों से ली गई राशि की वसूली कराई गई? क्या विभाग ने संबंधित दस्तावेज पुलिस अथवा अन्य जांच एजेंसी को सौंपे? इन सवालों पर विभाग की स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।
जेई पर कार्रवाई क्यों नहीं? क्या विभाग का पूरा काम आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे है?
कुरई विद्युत वितरण केंद्र में पदस्थ जेई और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी अब जांच के दायरे में आनी चाहिए। आखिर एक हेल्पर को किस अधिकार से किसानों से कनेक्शन के नाम पर रकम लेने और बिजली लाइन जोड़ने का अवसर मिला? अवैध कनेक्शन की प्रक्रिया इतनी आसानी से कैसे चलती रही? क्षेत्र में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी या फिर निगरानी व्यवस्था जानबूझकर कमजोर रखी गई?
क्षेत्र में आरोप लगाए जा रहे हैं कि महिपाल को कुछ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था और इसी कारण उसके हौसले बुलंद थे। कुछ लोगों का यह भी दावा है कि मामले की पूरी परतें खुलने पर कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। इसी कारण कार्रवाई को सीमित रखने और मामले को रफा-दफा करने के प्रयासों की चर्चाएं भी क्षेत्र में हैं। इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है, लेकिन विभाग की निष्पक्ष जांच ही इन आशंकाओं का जवाब दे सकती है।
महिपाल पर कार्रवाई, धर्मेंद्र डहरवाल का तबादला! यह कैसा विभागीय न्याय?
एक ओर महिपाल को जांच में दोषी पाए जाने के बाद विभागीय काम से हटाए जाने की जानकारी है, वहीं दूसरी ओर आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेंद्र डहरवाल को कुरई डीसी से बादलपार डीसी स्थानांतरित कर दिया गया है। क्षेत्र में धर्मेंद्र को ईमानदारी से काम करने वाला कर्मचारी बताया जा रहा है। उनके स्थानांतरण को लेकर कुछ लोगों ने दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई की आशंका जताई है।
अब विभाग को यह बताना चाहिए कि धर्मेंद्र डहरवाल का तबादला किन प्रशासनिक कारणों से किया गया? क्या उनके कार्य निष्पादन में कोई कमी पाई गई थी? यदि नहीं, तो उन्हें अचानक स्थानांतरित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? एक ओर कथित वसूली के मामले में दोषी कर्मचारी पर कार्रवाई हुई और दूसरी ओर ईमानदार बताए जा रहे कर्मचारी का स्थानांतरण चर्चा का विषय बना हुआ है। विभागीय निर्णयों में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि कर्मचारियों के बीच भी गलत संदेश न जाए।
56 से 60 लाख रुपये की कथित अनियमितता का दावा, पूरे कुरई क्षेत्र की जांच हो
क्षेत्रीय लोगों का दावा है कि कुरई विद्युत वितरण केंद्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण अंचलों में विद्युत कनेक्शन के नाम पर कथित वसूली का दायरा काफी बड़ा हो सकता है। कुछ लोगों द्वारा 56 से 60 लाख रुपये तक की अनियमितता की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इस राशि की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इसकी वास्तविकता उपभोक्ताओं के बयान, कनेक्शन संबंधी दस्तावेज, विभागीय रसीदों, राजस्व खातों और फील्ड जांच के बाद ही सामने आ सकती है।
विभाग के जिला और संभागीय अधिकारियों से सीधे सवाल
क्षेत्रीय नागरिकों ने मांग की है कि कुरई विद्युत वितरण केंद्र के अंतर्गत आने वाले सभी ग्रामीण क्षेत्रों में उच्चस्तरीय जांच दल भेजा जाए। सभी विद्युत कनेक्शनों का भौतिक सत्यापन हो, किसानों से ली गई राशि और विभागीय राजस्व जमा का मिलान कराया जाए, टुरिया क्षेत्र के रिसॉर्टों की बिजली आपूर्ति की जांच हो तथा महिपाल के विरुद्ध हुई विभागीय जांच की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही संबंधित जेई और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका तय कर दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल—किसानों से कथित अवैध वसूली हुई, विभागीय जांच में कर्मचारी दोषी पाया गया, फिर एफआईआर दर्ज कराने में देरी क्यों? क्या विभाग का पूरा मैदानी तंत्र आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया गया है? जेई और वरिष्ठ अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से कैसे बच सकते हैं?
यदि विभाग वास्तव में किसानों के हितों के प्रति गंभीर है तो उसे केवल एक कर्मचारी को हटाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मानने के बजाय पूरे नेटवर्क की जांच करनी होगी।
किसानों की मेहनत की कमाई से कथित वसूली और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर पर्दा नहीं, बल्कि पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई होनी चाहिए। अब निगाहें विद्युत विभाग के जिला और संभागीय अधिकारियों पर हैं कि वे इस मामले में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने का साहस दिखाते हैं या फिर यह मामला भी विभागीय फाइलों में दबकर रह जाएगा।