सुपर सीडर और हैप्पी सीडर से नरवाई प्रबंधन की समझाइश, रबी में कम पानी वाली दलहन-तिलहन फसलें अपनाने की सलाह
Seoni, 05 November 2026
सिवनी यशो:- खेतों में फसल कटाई के बाद नरवाई जलाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने और खेती को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से ग्राम झीलपिपरिया में कृषक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रम (आत्मा) योजनांतर्गत आयोजित इस प्रशिक्षण में किसानों को नरवाई प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य, फसल विविधीकरण और आगामी रबी मौसम की फसलों के चयन की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने नरवाई नहीं जलाने की शपथ भी ली।
कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार के निर्देशानुसार तथा उपसंचालक कृषि एवं परियोजना संचालक आत्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण में किसानों को बताया गया कि फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करना मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है। इसके लिए सुपर सीडर, हैप्पी सीडर एवं वेलर मशीनों के उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही फसल अवशेषों को खेत में ही उपयोग करने और फसल आच्छादन के फायदे समझाए गए।
प्राकृतिक खेती के जैविक आदानों की बताई विधियां
प्रशिक्षण में किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति प्रोत्साहित करते हुए बीजामृत, जीवामृत, दशपर्णी अर्क एवं नीमास्त्र जैसे जैविक आदान तैयार करने की विधियां समझाई गईं। किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों के विपणन के लिए सिवनी में संचालित जैविक हाट बाजार की जानकारी भी दी गई, ताकि उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ सकें।
कम पानी में तैयार होने वाली फसलें अपनाने की सलाह
अल्प वर्षा की स्थिति को देखते हुए किसानों को आगामी रबी मौसम में कम सिंचाई वाली फसलें अपनाने की सलाह दी गई। इनमें मसूर, चना, सरसों, अलसी, सूरजमुखी एवं कुसुम प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही दलहन और तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने, फसल चक्रण तथा फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
मिट्टी की जांच से बढ़ेगी खेती की गुणवत्ता
किसानों को खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्रित करने, मृदा परीक्षण कराने तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि मिट्टी की आवश्यकता के अनुरूप खाद एवं उर्वरकों का उपयोग करने से खेती की लागत नियंत्रित रखने और मृदा उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ना, खेती की लागत कम करना, पर्यावरण एवं मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण करना तथा कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि के लिए जागरूक करना रहा।