27 माह तक दोहरा वेतन भुगतान कैसे होता रहा? 22.87 लाख की वसूली के बाद भी कई सवाल बरकरार, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
Seoni, 05 November 2026
सिवनी / घंसौर यशो:- जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत घंसौर में सामने आए बहुचर्चित डबल सैलरी कांड में अब जांच का दायरा बढ़ गया है। दोहरे वेतन भुगतान को लेकर लगातार उठ रहे सवालों और प्रकाशित खबरों के बाद सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सिवनी लालजी राम मीणा ने चार सदस्यीय जांच दल गठित कर दिया है। जांच टीम को तीन दिवस के भीतर संपूर्ण जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच आदेश जारी होने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
गठित जांच दल में विकासखंड अधिकारी घंसौर मनीष कुमार मिश्रा, प्राचार्य जगदीप तिवारी भिलाई, प्राचार्य ऋतुराज धामनिया घोटखेड़ा तथा आशीष साहू सिवनी को शामिल किया गया है। टीम को प्रकरण की बारीकी से जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
27 माह तक दो जगह से वेतन भुगतान, फिर 22.87 लाख की वसूली!
गौरतलब है कि शासकीय शिक्षक चेतराम बरकड़े से जुड़े इस प्रकरण में मूल पदस्थापना और प्रतिनियुक्ति के दौरान कथित रूप से दो अलग-अलग स्थानों से वेतन भुगतान का मामला सामने आया था। पूर्व में इस प्रकरण में लगभग 22.87 लाख रुपये की वसूली का उल्लेख भी सामने आया, लेकिन रकम की वसूली से मामला समाप्त नहीं हो जाता। असली सवाल यह है कि आखिर 27 माह तक दोहरे वेतन भुगतान की स्थिति बनी कैसे रही?
क्या दोनों कार्यालयों में वेतन भुगतान के लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई जा रही थी? वेतन बिल किसने तैयार किए, उनका सत्यापन किसने किया और भुगतान की स्वीकृति किस अधिकारी ने दी? क्या संबंधित कार्यालयों के जिम्मेदार अधिकारियों को दोहरे भुगतान की जानकारी नहीं थी या फिर विभागीय निगरानी व्यवस्था में गंभीर चूक हुई?
सिर्फ वसूली नहीं, जिम्मेदारों की पहचान भी जरूरी
इस पूरे मामले में आईडी-पासवर्ड के इस्तेमाल, वेतन आहरण की प्रक्रिया और संबंधित कर्मचारियों एवं अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जांच का दायरा केवल दोहरे भुगतान और वसूली तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि भुगतान की पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई।
अब जांच टीम के सामने बड़ी चुनौती
तीन दिवस में रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय-सीमा के बीच जांच टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों कार्यालयों के वेतन अभिलेखों, उपस्थिति विवरण, प्रतिनियुक्ति आदेश, वेतन बिल, भुगतान स्वीकृति और संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान करना होगा। यदि जांच निष्पक्ष और दस्तावेजों के आधार पर होती है तो यह सामने आ सकता है कि दोहरे भुगतान की प्रक्रिया कैसे चली और इसमें किन-किन स्तरों पर जवाबदेही बनती है।
अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। सवाल केवल यह नहीं कि 22.87 लाख रुपये की वसूली हुई या नहीं, बल्कि यह भी है कि सरकारी धन के कथित दोहरे भुगतान की नौबत आखिर आई कैसे और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है?