विधायक दिनेश राय ने जंगल सफारी को दिखाई हरी झंडी, तीन दिन तक वन्यजीवन, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की पाठशाला में सीखेंगे विद्यार्थी
Seoni, 02 November 2026
सिवनी यशो:- पेंच के घने जंगल, वन्यजीवों की रोमांचक दुनिया और प्रकृति के अनमोल रहस्यों को करीब से जानने का अवसर लेकर राज्य स्तरीय मोगली बाल उत्सव 2026 का सोमवार को ग्राम टुरिया में आगाज हुआ। सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन ने जंगल सफारी के लिए प्रतिभागियों को हरी झंडी दिखाकर तीन दिवसीय आयोजन का शुभारंभ किया।
2 से 4 नवंबर तक चलने वाले इस उत्सव में प्रदेश के 55 जिलों से लगभग 288 विद्यार्थी एवं मार्गदर्शी शिक्षिकाएं शामिल हो रहे हैं।
इस बार मोगली बाल उत्सव विद्यार्थियों के लिए केवल एक प्रतियोगिता या मनोरंजक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति को प्रत्यक्ष रूप से समझने और उसके साथ जुड़ने का विशेष अवसर बनकर सामने आया है।

प्रदेश के प्रत्येक जिले से कनिष्ठ एवं वरिष्ठ वर्ग के एक-एक बालक और बालिका तथा एक मार्गदर्शी शिक्षिका को शामिल किया गया है। मेजबान सिवनी जिले से 16 विद्यार्थी और दो मार्गदर्शी शिक्षिकाओं सहित कुल 18 प्रतिभागी उत्सव में हिस्सा ले रहे हैं।
जंगल सफारी से लेकर ट्रेजर हंट तक होगा रोमांच
उत्सव के दौरान विद्यार्थियों को पेंच के प्राकृतिक परिवेश में जंगल सफारी, नेचर ट्रेल और ट्रेजर हंट जैसी गतिविधियों के माध्यम से वन्यजीवन को समझने का अवसर मिलेगा। जंगल सफारी में विद्यार्थी वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक रहवास का अवलोकन करेंगे, वहीं नेचर ट्रेल के जरिए पेड़-पौधों, वनस्पतियों और जैव विविधता की बारीकियों से परिचित होंगे।
ट्रेजर हंट में पहेलियों और रोचक गतिविधियों के माध्यम से जंगल के रहस्यों को समझने की चुनौती होगी। इसके अलावा वन्यजीव एवं जैव विविधता पर आधारित चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी, जिसमें बच्चे अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता का प्रदर्शन करेंगे।
पर्यावरण संरक्षण की सीख भी देंगे आयोजन के कार्यक्रम
मोगली बाल उत्सव में वन एवं वन्यजीव संरक्षण पर आधारित वृत्तचित्रों का प्रदर्शन किया जाएगा। विद्यार्थियों को वन विभाग की कार्यप्रणाली, वन संपदा के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के महत्व की जानकारी भी दी जाएगी।
कागज निर्माण की प्रक्रिया से परिचित कराने के साथ उसके पुनः उपयोग और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित होंगी।
इस आयोजन का मूल उद्देश्य बच्चों को किताबों में पढ़े प्रकृति के संसार से बाहर निकालकर वास्तविक जंगल और वन्यजीवन से परिचित कराना है।
पेंच का प्राकृतिक वातावरण विद्यार्थियों को सीखने, समझने और अनुभव करने का अवसर देगा। साथ ही उनमें वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता, पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी और प्रकृति के प्रति अपनत्व विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।