बस स्टैंड से दुर्गा चौक तक अतिक्रमण से बिगड़ी यातायात व्यवस्था, स्कूल समय में बच्चों को परेशानी; जाम में एंबुलेंस फंसने से मरीजों की जान पर भी बन रही आफत
Seoni, 07 November 2026
सिवनी / कान्हीवाड़ा यशो:- ग्राम पंचायत कान्हीवाड़ा में बस स्टैंड से दुर्गा चौक तक सड़क पर दुकानदारों के बढ़ते अतिक्रमण ने यातायात व्यवस्था को बदहाल कर दिया है। सड़क पर दुकानें सज रही हैं और आम नागरिक जाम में फंसकर परेशान हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि स्कूली बच्चों के आने-जाने के समय वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और लोगों को आधे-आधे घंटे तक रास्ता खुलने का इंतजार करना पड़ता है। सबसे चिंताजनक स्थिति तब बनती है, जब इसी जाम में मरीजों को लेकर जा रही एंबुलेंस भी फंस जाती है। इसके बावजूद जिम्मेदारों की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
सड़क बनी दुकान का विस्तार, राहगीरों के लिए रास्ता तक नहीं!
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर तिरपाल, पन्नी, गद्दे, रुई और अन्य सामान सड़क की पटरी तक फैला रखा है। विशेषकर कुछ कपड़ा दुकानदारों द्वारा दुकान का सामान काफी दूर तक सड़क पर रख दिया जाता है। नतीजतन सड़क का बड़ा हिस्सा व्यापारिक गतिविधियों की भेंट चढ़ रहा है।
आवागमन के लिए सीमित जगह बचने से दोपहिया और चारपहिया वाहनों को निकलने में भारी परेशानी होती है। दुकानों पर आने वाले ग्राहक भी अपने वाहन सड़क पर ही खड़े कर देते हैं, जिससे जाम की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
स्कूल की छुट्टी होते ही जाम का झाम, आधे घंटे तक फंसे रहते हैं वाहन
इस मार्ग पर सबसे ज्यादा परेशानी सुबह स्कूल खुलने और दोपहर में छुट्टी होने के समय सामने आती है। स्कूली बच्चों, अभिभावकों और अन्य राहगीरों को जाम के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बस स्टैंड से दुर्गा चौक तक वाहनों की कतार लग जाती है और कई बार आधे घंटे तक आवागमन सामान्य नहीं हो पाता। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर यातायात का दबाव देखते हुए अतिक्रमण और सड़क पर खड़े वाहनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई जरूरी है।
एंबुलेंस भी जाम में फंसी तो जिम्मेदार कौन?
यातायात अव्यवस्था का सबसे गंभीर पहलू आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई बार मरीजों को लेकर आने-जाने वाली एंबुलेंस को भी जाम के कारण रास्ता मिलने में परेशानी होती है। अस्पताल पहुंचने में कुछ मिनटों की देरी भी मरीज के लिए गंभीर साबित हो सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि किसी आपात स्थिति में एंबुलेंस लंबे समय तक जाम में फंसी रही और मरीज को नुकसान पहुंचा तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
अधिकारियों की आवाजाही, फिर भी समस्या जस की तस!
हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से शासन-प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी भी प्रतिदिन गुजरते हैं। इसके बावजूद सड़क पर फैलते अतिक्रमण और लगातार बिगड़ती यातायात व्यवस्था का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक सड़क किसी की निजी दुकान का विस्तार नहीं हो सकती। व्यापार करने का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन इसके नाम पर आम नागरिकों के आवागमन का रास्ता रोकना कहां तक उचित है?
क्या किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? जब स्कूली बच्चों से लेकर मरीजों तक को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है, तब भी यदि सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराने की पहल नहीं होती तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि बस स्टैंड से दुर्गा चौक तक तत्काल निरीक्षण कराया जाए। सड़क पर सामान फैलाकर व्यापार करने वालों को निर्धारित सीमा में दुकान संचालित करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही सड़क की पटरी को अतिक्रमण मुक्त कराकर बेतरतीब वाहन खड़े करने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाए।
कान्हीवाड़ा के नागरिकों की मांग स्पष्ट है—व्यापार भी चले, लेकिन आम जनता का रास्ता बंद करके नहीं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस रोजमर्रा की समस्या को गंभीरता से लेकर यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कब ठोस कदम उठाता है।