सिवनी में आवारा कुत्तों का तांडव, 30 से अधिक लोग लहूलुहान – नगर पालिका की लापरवाही से शहर बना डर का अड्डा
बुधवारी बाजार से दादू मोहल्ला तक दहशत, जिला अस्पताल बना युद्ध क्षेत्र — नसबंदी के नाम पर खर्च हुए लाखों रुपये सवालों के घेरे में
सिवनी की सड़कों पर मौत दौड़ रही है, कुत्तों के आतंक ने 30 लोगों को किया घायल
Seoni 19 January 2026
सिवनी यशो: सिवनी नगरीय क्षेत्र की सड़कों पर अब आम आदमी नहीं, बल्कि डर चलता नजर आ रहा है। आवारा कुत्तों के बेकाबू आतंक ने पूरे शहर को दहला कर रख दिया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जनता की इस चीख-पुकार के बावजूद नगर पालिका और नगरीय प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। कुत्तों की नसबंदी और पकड़ने के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि शहर की हर गली, हर मोहल्ला आज कुत्तों के हवाले हो चुका है।
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सड़कें अब सुरक्षित नहीं, जनता थर-थर कांप रही
सोमवार को सिवनी जिला मुख्यालय की सड़कों पर हालात विस्फोटक हो गए, जब बुधवारी बाजार क्षेत्र से लेकर दादू मोहल्ला तक एक आवारा कुत्ते ने आतंक मचा दिया। एक ही दिन में 30 से अधिक मासूमों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं पर हमला हुआ। कोई सड़क पर गिरकर घायल हुआ तो कोई लहूलुहान हालत में मदद की गुहार लगाता नजर आया। यह प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता सबूत है।
नगरीय क्षेत्र की स्थिति यह है कि दुपहिया वाहन चालकों के पीछे झुंड में दौड़ते कुत्ते अब आम दृश्य बन चुके हैं। कई वाहन चालक जान बचाने के प्रयास में सड़क पर गिर चुके हैं। सुबह और रात के समय घर से निकलना अब साहस का काम बन गया है। छोटे बच्चों को कुत्तों ने निशाना बनाया है, वहीं गाय के बछड़ों को घेर-घेर कर मार डालने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
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जिला अस्पताल में चीख-पुकार, हालात युद्धक्षेत्र जैसे
19 जनवरी 2026 को जिला चिकित्सालय का दृश्य किसी युद्ध क्षेत्र से कम नहीं था।
एक के बाद एक घायल अस्पताल पहुंचते रहे। किसी के पैर का मांस नोच लिया गया था,
तो कोई बच्चा चेहरे पर गहरे जख्म लेकर रोता-बिलखता दिखा।
एंटी-रेबीज इंजेक्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। अस्पताल परिसर में पूरे दिन अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

प्रशासन की कुंभकर्णी नींद पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाला नगरीय प्रशासन आखिर किस कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है? नसबंदी के नाम पर हर साल जो बजट जारी होता है, वह आखिर गया कहां? क्या यह अभियान केवल कागजों तक सीमित रह गया है? रेबीज नियंत्रण और आवारा पशु नियंत्रण के दावे आखिर कब हकीकत बनेंगे?

अब यह स्थिति केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जनता की जान से सीधा खिलवाड़ बन चुकी है।
यदि शीघ्र ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई,
तो आने वाले दिनों में सिवनी की सड़कों पर हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
इसके लिए पूरी जवाबदेही नगर पालिका और नगरीय प्रशासन की होगी।
आजाद वार्ड, डायमंड चौक, मिशन स्कूल क्षेत्रों में कुत्तों का आतंक
सिवनी शहर में आवारा कुत्तों का आतंक अब शहर के प्रमुख मोहल्लों और चौराहों तक पहुँच गया है।
अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार को केवल आजाद वार्ड, डायमंड चौक और मिशन स्कूल क्षेत्रों में ही कुल 27 लोग कुत्तों के हमले में घायल हुए। इनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं।
स्थानीय लोग सुबह और शाम घर से निकलते समय अत्यधिक सावधानी बरत रहे हैं।
कई वाहन चालकों को कुत्तों ने पीछा किया और सड़क पर गिरने से चोटें आई हैं।
छोटे बच्चों को कुत्तों ने निशाना बनाया और गाय के बछड़े भी इन हमलों से सुरक्षित नहीं रहे।
यह स्थिति नगर पालिका और नगरीय प्रशासन की गंभीर उदासीनता को दर्शाती है।
प्रशासन से जवाब:
नगर पालिका द्वारा हर वर्ष आवारा कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन वर्तमान हालात इसके बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। यदि बजट जारी हुआ, तो उसका वास्तविक उपयोग कहां हुआ? नसबंदी अभियान कागजों तक सीमित क्यों रह गया? रेबीज नियंत्रण और जनता की सुरक्षा को लेकर ठोस कार्रवाई कब होगी? लगातार बढ़ती घटनाओं के बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।



