प्रांजुल हरिनखेड़े मृत्यु प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच हो: पत्नी ने सांसद कुलस्ते से लगाई न्याय की गुहार
लंबित वेतन, वेतन वृद्धि भुगतान में देरी और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग, सांसद को सौंपा आवेदन
प्रांजुल हरिनखेड़े मृत्यु प्रकरण: पत्नी ने सांसद कुलस्ते से मांगी उच्च स्तरीय जांच
Seoni, 18 June 2026
सिवनी यशो:- सेवा सहकारी समिति भोमा के विक्रेता रहे स्वर्गीय प्रांजुल हरिनखेड़े की पत्नी अन्वेशा हरिनखेड़े ने सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते को आवेदन सौंपकर पति की मृत्यु प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा प्रथम दृष्टया उत्तरदायी प्रतीत होने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
सांसद को दिए आवेदन में अन्वेशा हरिनखेड़े ने उल्लेख किया है कि उनके पति प्रांजुल हरिनखेड़े सेवा सहकारी समिति भोमा में विक्रेता के पद पर कार्यरत थे तथा 3 जून 2026 को उनकी असामयिक मृत्यु हो गई। आवेदन के अनुसार मृत्यु से पूर्व वे आर्थिक एवं मानसिक तनाव की स्थिति से गुजर रहे थे।
वेतन और वेतन वृद्धि लंबित होने का आरोप
आवेदन में दावा किया गया है कि मृतक का लगभग 4 से 5 माह का वेतन लंबित था तथा करीब 10 से 11 माह से वेतन वृद्धि का भुगतान भी नहीं किया गया था। इस संबंध में उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से मौखिक एवं लिखित रूप से निवेदन किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
कार्यस्थल पर मानसिक दबाव की भी जांच कराने की मांग
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि समिति के प्रशासक दिलीप डेहरिया, कंप्यूटर ऑपरेटर अजय टेमरे तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी जितेंद्र हनवत के व्यवहार और कार्यशैली के कारण मृतक स्वयं को मानसिक रूप से प्रताड़ित एवं दबावग्रस्त महसूस करते थे। हालांकि आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन आरोपों की सत्यता सक्षम जांच का विषय है।
मृतक की पत्नी ने आवेदन में कहा है कि मृत्यु से पूर्व हुई बातचीत में भी उनके पति ने स्वयं को अत्यधिक परेशान एवं मानसिक रूप से व्यथित बताया था। आवेदन के अनुसार उन्होंने कार्यस्थल पर प्रतिकूल परिस्थितियां निर्मित किए जाने की बात भी परिवार के सदस्यों से साझा की थी।
अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
आवेदन में मांग की गई है कि मृतक की मृत्यु से पूर्व की परिस्थितियों, लंबित वेतन भुगतान, वेतन वृद्धि भुगतान में देरी, कार्यस्थल के वातावरण तथा संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
साथ ही जांच में यदि किसी की लापरवाही, उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना अथवा अन्य प्रकार की जिम्मेदारी स्थापित होती है तो उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए।
इसके अतिरिक्त पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने एवं आर्थिक स्थिति को देखते हुए शासन स्तर से सहायता प्रदान करने की मांग भी की गई है।
(नोट: समाचार मृतक की पत्नी द्वारा सांसद को सौंपे गए आवेदन में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों अथवा कर्मचारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)




