बखारी में गूंजा कौमी एकता का पैगाम, ग्यारवीं शरीफ में उमड़ा जनसैलाब
मुफ्ती तौहिद आलम साहब रजवी ने कहा- गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारा ही हिंदुस्तान की खूबसूरती
बखारी में गूंजा कौमी एकता का पैगाम, ग्यारवीं शरीफ में उमड़ी भीड़
सिवनी/बखारी यशो :- ग्राम बखारी में विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत शेख अब्दुल कादिर जिलानी रहमतुल्लाह अलैह की याद में ग्यारवीं शरीफ के अवसर पर धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न समुदायों के लोगों ने बड़ी संख्या में शामिल होकर लंगर में सहभागिता की और कौमी एकता, भाईचारे तथा सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।
कार्यक्रम के संबंध में सूफी सामाजिक कार्यकर्ता सूफी मंजूर रजा कादरी द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यक्रम में सिवनी से पहुंचे हजरत अल्लामा मौलाना मुफ्ती तौहिद आलम साहब रजवी, खतिबो इमाम मस्जिद नूर अंबिया, राज्य परिवहन बस स्टैंड ने संबोधित किया।
मुफ्ती तौहिद आलम साहब रजवी ने बखारी में आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे भारतीय परंपरा और गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करने वाला आयोजन बताया। उन्होंने आयोजन समिति और ग्रामवासियों को ग्यारवीं शरीफ की मुबारकबाद दी।
‘एकता और भाईचारा कायम रखना हम सबकी जिम्मेदारी’
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि देश की खूबसूरती उसकी एकता, अखंडता और आपसी भाईचारे में है। उन्होंने कहा कि समाज में नफरत और वैमनस्य फैलाने वाली प्रवृत्तियों से सावधान रहते हुए सभी समुदायों को मिल-जुलकर शांति और सद्भाव बनाए रखने की जरूरत है।
उन्होंने सूफी संतों, दरगाहों और खानकाहों को आस्था एवं सामाजिक मेल-मिलाप के केंद्र बताते हुए कहा कि इन स्थानों पर विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार पहुंचते हैं। उनके अनुसार यही विविधता भारत की सांस्कृतिक पहचान और खूबसूरती है।
बच्चों की शिक्षा पर दिया जोर
मुफ्ती तौहिद आलम ने मुस्लिम समाज से फिजूलखर्ची रोककर शिक्षा पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों और बच्चियों को आधुनिक एवं उच्च शिक्षा दिलाने के लिए समाज को गंभीर प्रयास करने चाहिए।
उन्होंने स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और अस्पताल जैसी संस्थाएं विकसित करने के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज के विकास का सबसे मजबूत माध्यम शिक्षा है और नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना जरूरी है।
समाज के विकास और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के संसाधनों के उपयोग को लेकर भी अपने विचार रखे। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि सामाजिक विकास, शिक्षा और जरूरतमंदों की सहायता के लिए संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग किया जाए।
उन्होंने कहा कि सूफी विचारधारा का संदेश प्यार, मोहब्बत, इंसानियत और लोगों को जोड़ने का है और समाज को इसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
बड़ी संख्या में लोगों ने की शिरकत
ग्यारवीं शरीफ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुस्लिम समाज की महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। ग्राम के हाजी हजरात, उलेमा-ए-अहले सुन्नत सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारे, शिक्षा और समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
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