बालाघाट के दूरस्थ क्षेत्रों में मजबूत हुआ स्वास्थ्य नेटवर्क, 3100 से अधिक डॉक्टरों की पोस्टिंग
14 नए स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत, 30 बेड का CHC और 10 उप स्वास्थ्य केंद्र होंगे विकसित; संस्थागत प्रसव 21% से बढ़कर 92% होने का सरकार का दावा
बालाघाट में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, 3100 डॉक्टरों की पोस्टिंग
भोपाल/बालाघाट यशो :- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के अनुसार प्रदेश के दूरस्थ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए 3,100 से अधिक डॉक्टरों की पदस्थापना की गई है, जिनमें से 2,600 से अधिक डॉक्टरों ने पदभार ग्रहण कर लिया है।
बालाघाट के नक्सल प्रभावित रहे दूरस्थ क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का दावा किया गया है। सरकार के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित दो विकासखंडों में 14 नए स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। इनमें एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 30-बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में परिवर्तित किया गया है। इसके अलावा 2 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 2 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 10 उप स्वास्थ्य केंद्र विकसित किए गए हैं।
50 गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर
राजेंद्र शुक्ल के अनुसार बालाघाट के दो विकासखंडों के करीब 50 गांवों में स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच बढ़ी है। सरकार का कहना है कि पहले नक्सल गतिविधियों के कारण इन दूरस्थ क्षेत्रों तक नियमित प्रशासनिक और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था।
नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के बाद इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियां बढ़ाई गई हैं और गांवों में स्वास्थ्य जांच, उपचार तथा पोषण संबंधी सेवाओं की पहुंच मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
दूरस्थ PHC में डॉक्टरों की कमी दूर करने का दावा
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के दूरस्थ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर पदस्थापन किया गया है।
इन स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से सामान्य बीमारियों के उपचार के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और अन्य बीमारियों की जांच एवं उपचार की सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा।
जरूरत पड़ने पर गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कॉलेज रेफर करने की व्यवस्था भी रहेगी।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर विशेष फोकस
बालाघाट के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के साथ गर्भवती महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीयन, प्रसवपूर्व जांच, हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।
संस्थागत प्रसव 21 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत होने का दावा
राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि वर्ष 2003 से पहले संस्थागत प्रसव का स्तर 21 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 92 प्रतिशत हो गया है।
सरकार के अनुसार संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के साथ गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान और स्वास्थ्य संस्थानों तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करने पर लगातार काम किया जा रहा है।
4 नए CDPO और 52 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका
दूरस्थ गांवों में बच्चों और महिलाओं तक स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए 4 नए बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) तथा 52 अतिरिक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं की पदस्थापना की गई है।
इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी व्यवस्था के माध्यम से बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य जांच और अन्य आवश्यक सेवाओं को गांवों तक नियमित रूप से पहुंचाना है।
टीकाकरण, ORS-जिंक और पोषण सेवाओं पर जोर
सरकार के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में टीकाकरण, ORS-जिंक वितरण, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की पहुंच बढ़ाई गई है।
बच्चों में कुपोषण की पहचान, बीमार बच्चों के उपचार और गंभीर स्थिति में उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
प्राथमिक से मेडिकल कॉलेज तक उपचार की कड़ी
नई व्यवस्था में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को शुरुआती जांच और उपचार का प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है। गंभीर मरीजों को आवश्यकता के अनुसार जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज तक रेफर किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था को केवल प्राथमिक स्तर तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि प्राथमिक, सेकेंडरी और टर्शियरी हेल्थ केयर को आपस में जोड़कर उपचार की पूरी श्रृंखला मजबूत की जा रही है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदली स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर—सरकार
राजेंद्र शुक्ल के अनुसार नक्सल गतिविधियों के कारण लंबे समय तक बालाघाट के कुछ दूरस्थ क्षेत्रों में प्रशासनिक और स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित पहुंच कठिन रही। अब सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी और अन्य नागरिक सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य केंद्र खोलना नहीं, बल्कि दूरस्थ गांवों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक डॉक्टर, दवा, जांच, टीकाकरण, पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
सरकार के अनुसार स्वास्थ्य सेवा विस्तार के प्रमुख कदम
- 3,100 से अधिक डॉक्टरों की पोस्टिंग
- 2,600 से अधिक डॉक्टरों ने पदभार संभाला
- 14 नए स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत
- 1 PHC को 30-बेड CHC में उन्नयन
- 2 नए PHC
- 2 नए CHC
- 10 उप स्वास्थ्य केंद्र
- 4 नए CDPO
- 52 अतिरिक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका
- गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच पर जोर
- बच्चों के पूर्ण टीकाकरण पर फोकस
- ORS-जिंक वितरण एवं पोषण सेवाओं का विस्तार
- गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज रेफर करने की व्यवस्था
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के अनुसार सरकार का लक्ष्य दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर प्रत्येक परिवार और प्रत्येक बच्चे तक सरकारी स्वास्थ्य एवं पोषण सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।
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