छिंदवाड़ा में कांग्रेस का चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार का मुखौटा पहनाकर निकाला जुलूस
हाथों में हथकड़ी लगाकर जताया विरोध, कलेक्ट्रेट के सामने पुतला दहन; राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों की जांच की मांग
छिंदवाड़ा में कांग्रेस का प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन
Chhindwara, 30 September 2026
छिंदवाड़ा यशो:- चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने बुधवार को छिंदवाड़ा में जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मुखौटा पहनाकर एक व्यक्ति के हाथों में हथकड़ी लगाई और शहर के प्रमुख मार्गों से उसका जुलूस निकाला। इसके बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन किया गया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
कांग्रेस का यह प्रदर्शन पहले से घोषित आंदोलन के तहत हुआ। जिला कांग्रेस ने 30 सितंबर को राजीव भवन से कलेक्ट्रेट तक रैली निकालने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने की घोषणा की थी।

‘वोट चोरी’ के नारे लगाते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ता
कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन से शुरू हुई रैली जिला अस्पताल, सिटी कोतवाली, महात्मा गांधी चौक, गर्ल्स कॉलेज, इंदिरा तिराहा और डॉ. आंबेडकर चौराहा होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘वोट चोरी’ और ‘वोटर चोर गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए।
कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पानी की बौछार के बीच प्रदर्शन का दावा
कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि कलेक्ट्रेट गेट पर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इसके बावजूद कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे।
विश्वनाथ ओकटे ने लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष विश्वनाथ ओकटे ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियों के कारण कांग्रेस को नुकसान हुआ है। उन्होंने छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए स्ट्रांग रूम में बिजली आपूर्ति बाधित होने सहित कई सवाल उठाए और इन मामलों की जांच की मांग की।
ओकटे ने यह भी दावा किया कि छिंदवाड़ा की जनता ने अपना मत कांग्रेस प्रत्याशी नकुलनाथ के पक्ष में दिया था। इन दावों के समर्थन में उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और मतगणना से जुड़े मुद्दों की जांच की मांग रखी।
14 आपत्तियों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में निर्वाचन आयोग के भीतर पिछले करीब 10 महीनों में दर्ज 14 औपचारिक आपत्तियों का मुद्दा उठाया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने विभिन्न निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर 14 अवसरों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता पंजीयन, Form-6 में बदलाव, मतदाता सूची के डेटा तक पहुंच और निर्वाचन आयोग की तकनीकी व्यवस्था से जुड़े विषय शामिल थे।
हालांकि, निर्वाचन आयोग की ओर से यह कहा गया है कि SIR सहित आयोग के महत्वपूर्ण निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे और प्रक्रिया में मतभेदों को सामान्य संस्थागत विचार-विमर्श के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस ने ज्ञापन में रखीं ये प्रमुख मांगें
कांग्रेस ने राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन में मांग की कि—
- 14 आपत्तियों का विषय, आधार, रिकॉर्ड और अंतिम निर्णय सार्वजनिक किया जाए।
- SIR का विधानसभा और बूथवार डेटा सार्वजनिक किया जाए।
- मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने के कारणों की जानकारी दी जाए।
- वास्तविक मतदाताओं को आपत्ति और अपील का पर्याप्त अवसर दिया जाए।
- पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
- मतदाता सूची से जुड़ी कथित गंभीर अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
- निर्वाचन आयोग अपनी निर्णय प्रक्रिया और कार्यप्रणाली पर दस्तावेजों सहित सार्वजनिक स्पष्टीकरण दे।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कार्रवाई की जाए।
बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता हुए शामिल
प्रदर्शन में जिला कांग्रेस, शहर कांग्रेस, महिला कांग्रेस, युवक कांग्रेस, किसान कांग्रेस, एनएसयूआई, ब्लॉक एवं ग्रामीण कांग्रेस सहित विभिन्न विभागों और प्रकोष्ठों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस ने दावा किया कि जिलेभर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और आमजन प्रदर्शन में पहुंचे।
देशभर में SIR और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग लगातार उठाई जा रही है। वहीं निर्वाचन आयोग ने अपने स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों का खंडन करते हुए महत्वपूर्ण निर्णयों को आयोग की सामूहिक मंजूरी से लिया जाना बताया है।
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