मध्यप्रदेशछिंदवाड़ा

संविदा कर्मचारी ने हाईकोर्ट में दायर कराई कैविएट

11 स्थानांतरित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

Chhindwara 10 January 2026
छिंदवाड़ा यशो:- प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की जनरल मैनेजर (जीएम) कविता पटवा की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों में घिर गई है। छिंदवाड़ा इकाई से स्थानांतरित किए गए 11 कर्मचारियों के खिलाफ हाईकोर्ट में कैविएट दायर कराए जाने से प्रशासनिक और कानूनी हलकों में तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

इन 11 कर्मचारियों में संविदा, प्यून और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी शामिल हैं, जिनका स्थानांतरण नियमों के विपरीत बताए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

जिला विभाजन के बाद भी विवादित युक्तियुक्तकरण

पांढुर्णा के नया जिला बनने के बाद पीएमजीएसवाई की इकाई-2 को पांढुर्णा स्थानांतरित किया गया, जबकि छिंदवाड़ा की दोनों इकाइयों का युक्तियुक्तकरण किया गया।
आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान साठगांठ के चलते कुछ कर्मचारियों को जबरन पांढुर्णा भेज दिया गया, जबकि उनके पद और सेवा शर्तें इसकी अनुमति नहीं देतीं।

सेवानिवृत्त व संविदा कर्मचारियों का भी स्थानांतरण!

11 कर्मचारियों में शामिल—

  • देवेन्द्र दुबे, सहायक ग्रेड-2, जो कलेक्टर दर पर सेवा निवृत्ति के बाद पीएमजीएसवाई छिंदवाड़ा में पदस्थ थे

  • चार संविदा प्यून

इन सभी का पांढुर्णा स्थानांतरण किया गया, जबकि कलेक्टर दर अथवा संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के अन्य जिले में स्थानांतरण का कोई प्रावधान नहीं है।
इसके बावजूद इनके खिलाफ हाईकोर्ट में कैविएट दायर कराई गई, जिसे शासकीय धन के दुरुपयोग के रूप में देखा जा रहा है।

पहले ही मिल चुकी है कोर्ट से राहत

गौरतलब है कि इससे पहले कुछ कर्मचारियों ने स्थानांतरण के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था, जहां उन्हें राहत भी मिली।
इसके बाद आशंका जताई जा रही थी कि अन्य प्रभावित कर्मचारी भी न्यायालय जाएंगे।

कर्मचारियों को कोर्ट जाने से रोकने की कोशिश?

इसी बीच जीएम कविता पटवा द्वारा हाईकोर्ट में कैविएट दायर कराई गई, ताकि किसी भी कर्मचारी को बिना पक्ष सुने राहत न मिल सके।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में गंभीर नियम उल्लंघन सामने आया है।

अनुमति से पहले ही कैविएट दायर!

तथ्यों के अनुसार—

  • 08 अक्टूबर 2025 को जीएम द्वारा भोपाल मुख्यालय को कैविएट दायर करने की अनुमति हेतु पत्र लिखा गया

  • 31 अक्टूबर 2025 को मुख्यालय से अनुमति पूर्व प्रभाव से दी गई

  • लेकिन 17 अक्टूबर 2025 को ही हाईकोर्ट में कैविएट दायर कर दी गई

यानी अनुमति मिलने से पहले ही न्यायालयीन प्रक्रिया अपनाई गई, जो प्रशासनिक नियमों के विपरीत मानी जा रही है।

अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल

  • क्या बिना सक्षम अनुमति न्यायालय में कैविएट दायर करना वैध है?

  • क्या यह कार्रवाई कर्मचारियों को न्याय से दूर रखने का प्रयास है?

  • क्या इसमें शासकीय धन का दुरुपयोग हुआ है?

पूरा मामला अब पीएमजीएसवाई और ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।

https://www.latestlaws.com/hindi/hindi-news/232049/

Dainikyashonnati

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