सिवनीमध्यप्रदेश

वन अधिकार कानून ग्राम सभा का अधिकार, वन विभाग का प्रशासनिक विवेक नहीं : डॉ. अशोक मर्सकोले

FRA और पेसा कानून के क्रियान्वयन पर कांग्रेस ने सरकार से पूछे सवाल, 6 अगस्त के वन विभागीय निर्देशों की फाइल नोटिंग और कानूनी राय सार्वजनिक करने की मांग

वन अधिकार कानून ग्राम सभा का अधिकार: डॉ. अशोक मर्सकोले ने सरकार से पूछे सवाल

Mandla 05 October 2026
मंडला यशो:-
 जिला कांग्रेस कमेटी मंडला के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले ने मध्यप्रदेश में वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA) और पेसा कानून (PESA) के क्रियान्वयन को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। 3 अक्टूबर को मंडला में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि संसद द्वारा बनाए गए कानून के तहत ग्राम सभा को मिले अधिकारों का पालन होना चाहिए, न कि विभागीय आदेशों के माध्यम से इन अधिकारों की सीमा तय की जानी चाहिए।

6 अगस्त के आदेश पर उठाए सवाल

डॉ. मर्सकोले ने कहा कि 6 अगस्त 2026 को तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) द्वारा सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों (CFR/CFRR) को लेकर कुछ निर्देश जारी किए गए थे। इन निर्देशों को लेकर ग्राम सभा की भूमिका और वन अधिकार कानून की प्रक्रिया पर सवाल उठे थे।

उन्होंने बताया कि इस मामले में केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पुनर्विचार की मांग की थी। बाद में 30 सितंबर 2026 को इन निर्देशों को स्थगित कर दिया गया।

डॉ. मर्सकोले ने कहा कि केवल आदेश को स्थगित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि आदेश जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी और यदि उसमें कानूनी त्रुटियां थीं तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई।

सरकार से पूछे 10 सवाल, रखीं पांच मांगें

डॉ. मर्सकोले ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश सरकार के सामने वन अधिकार कानून से जुड़े कई सवाल रखे। उनका कहना है कि FRA की धारा 6 के तहत वन अधिकारों के निर्धारण की प्रक्रिया ग्राम सभा से शुरू होती है। ऐसे में वन विभाग के प्रशासनिक निर्देशों से ग्राम सभा के अधिकारों की सीमा तय नहीं की जानी चाहिए।

उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि यदि 6 अगस्त का आदेश कानून के अनुरूप था तो उसे स्थगित क्यों किया गया और यदि उसमें खामियां थीं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई।

27 हजार गांवों में संभावित अधिकार, अब तक केवल चार ग्राम सभाएं?

डॉ. मर्सकोले ने दावा किया कि मध्यप्रदेश में करीब 27 हजार गांवों में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) मिलने की संभावना है, लेकिन अब तक केवल चार ग्राम सभाओं को यह अधिकार मिलने की बात सामने आई है।

उन्होंने सरकार से इस स्थिति का स्पष्ट कारण बताते हुए समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक करने की मांग की।

साथ ही उन्होंने 6 अगस्त 2026 के आदेश से संबंधित फाइल नोटिंग, कानूनी राय तथा प्रदेश के सभी जिलों में ग्राम सभाओं की वास्तविक स्थिति—स्वीकृत, लंबित और निरस्त दावों की संख्या—सार्वजनिक करने की मांग की।

मंडला में शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. मर्सकोले ने मंडला जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने ट्राइबल विभाग में पशुपालन विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए सहायक आयुक्त डॉ. अरुण शुक्ला को लेकर शिक्षकों में असंतोष और शैक्षणिक कार्यों में असंतुलन का आरोप लगाया तथा सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सरकार को घेरा

उन्होंने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि एम्बुलेंस सेवाओं की कमी के कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके अलावा रेडियोलॉजिस्ट तथा नाक-कान-गला विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण लोगों को उपचार के लिए मंडला से बाहर जाना पड़ रहा है।

डॉ. मर्सकोले ने कहा कि जनजातीय बहुल मंडला जैसे जिले में वन अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य सीधे आम लोगों के जीवन से जुड़े मुद्दे हैं। इन पर सरकार को स्पष्ट नीति और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

उन्होंने अपने संदेश में कहा—“वन बचाइए, ग्राम सभा का अधिकार बचाइए और कानून का पालन कराइए।”

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