55 जिलों के 288 प्रतिभागी पहुंचे पेंच, तीन दिन जंगल को करीब से जानेंगे; सिवनी के 18 विद्यार्थी भी होंगे शामिल
Seoni, 01 November 2026
सिवनी यशो:- कहीं घने जंगल, कहीं वन्यजीवों की आहट और कहीं प्रकृति को करीब से देखने की उत्सुकता... पेंच के जंगल में सोमवार से बच्चों की एक अलग ही दुनिया आबाद होने जा रही है। प्रदेश के 55 जिलों से आए 288 विद्यार्थी और मार्गदर्शी शिक्षिकाएं मोगली बाल उत्सव में शामिल होने टुरिया पहुंच चुके हैं। सोमवार सुबह 5 बजे जंगल सफारी के साथ उत्सव की शुरुआत होगी। अगले तीन दिन बच्चे किताबों से बाहर निकलकर जंगल की दुनिया को अपनी आंखों से देखेंगे और समझेंगे।

पेंच राष्ट्रीय उद्यान के ग्राम टुरिया में 2 से 4 नवंबर तक आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय मोगली बाल उत्सव को लेकर प्रतिभागियों का पहुंचना शुरू हो गया है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए बच्चों के लिए यह जंगल की दुनिया को नजदीक से जानने का अवसर है। सफारी के दौरान उन्हें वन्यजीवों के प्राकृतिक रहवास, जंगल के वातावरण और जैव विविधता को समझने का मौका मिलेगा।
55 जिलों से आए बच्चे, सिवनी के 18 प्रतिभागी भी मैदान में
उत्सव में प्रदेश के सभी 55 जिलों से लगभग 288 विद्यार्थी एवं मार्गदर्शी शिक्षिकाएं हिस्सा ले रहे हैं। प्रत्येक जिले से कनिष्ठ वर्ग के एक बालक और एक बालिका तथा वरिष्ठ वर्ग के एक बालक और एक बालिका का चयन किया गया है। इनके साथ एक मार्गदर्शी शिक्षिका भी आई हैं।
मेजबान सिवनी जिले की ओर से कनिष्ठ और वरिष्ठ वर्ग के 4-4 बालक तथा 4-4 बालिकाएं शामिल हो रही हैं। इनके साथ दो मार्गदर्शी शिक्षिकाएं भी रहेंगी। इस तरह सिवनी से कुल 18 प्रतिभागी उत्सव में अपनी भागीदारी निभाएंगे।

रात का ठहराव, फिर टुरिया तक पहुंचाए गए प्रतिभागी
दूर-दराज के जिलों से आने वाले बच्चों की व्यवस्था के लिए भी इंतजाम किए गए। रेल और बसों से पहुंचे 31 जिलों के प्रतिभागियों को जिला शिक्षा अधिकारी सिवनी की ओर से 1 नवंबर को एकत्रीकरण स्थल पर अल्प आवास उपलब्ध कराया गया। इसके बाद निर्धारित बसों से उन्हें टुरिया स्थित आयोजन स्थल तक पहुंचाया गया। शेष 24 जिलों के प्रतिभागी जिला शिक्षा अधिकारी जबलपुर के माध्यम से सीधे कार्यक्रम स्थल पहुंचे।
सुबह पांच बजे जंगल सफारी, फिर शुरू होंगी गतिविधियां
सोमवार सुबह 5 बजे अतिथियों की मौजूदगी में हरी झंडी दिखाकर जंगल सफारी रवाना की जाएगी। जंगल की सुबह, वन्यजीवों की हलचल और प्राकृतिक वातावरण के बीच बच्चों के उत्सव का आगाज होगा। इसके बाद तीन दिनों तक अलग-अलग गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को प्रकृति और वन्यजीवन से रूबरू कराया जाएगा।
इस आयोजन की खासियत यह है कि यहां बच्चों को केवल पर्यावरण संरक्षण का पाठ नहीं पढ़ाया जाएगा, बल्कि उन्हें जंगल के बीच रहकर प्रकृति को समझने का अनुभव मिलेगा। वन्यजीवों के रहवास, प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण से जुड़े सवालों को जानने-समझने के साथ उनकी जिज्ञासा, कल्पनाशीलता और तर्कशक्ति को भी परखने का अवसर मिलेगा।
पेंच का जंगल इन तीन दिनों में प्रदेशभर से आए बच्चों के लिए खुली पाठशाला बनेगा, जहां सीखने के लिए किताबों से ज्यादा जंगल का अनुभव काम आएगा।