पीपरवानी स्कूल में चार साल तक हुए लेन-देन पर सवाल, प्रभारी प्राचार्य को कंप्यूटर का ज्ञान नहीं होने से शिक्षक संभाल रहे थे भुगतान का काम
कुरई यशो:-
कुरई विकासखंड के हायर सेकेंडरी स्कूल पीपरवानी में शासकीय राशि के भुगतान को लेकर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल में पदस्थ शिक्षक लखन चौधरी द्वारा अपनी पत्नी लक्ष्मी चौधरी के नाम से संचालित बैंक खाते में विभिन्न मदों की सरकारी राशि का भुगतान कराया गया। बीते चार वर्षों के दौरान अलग-अलग मदों में 92 हजार रुपये से अधिक की राशि भुगतान किए जाने का मामला शिकायत के माध्यम से सामने आया है। इस संबंध में अभिषेक ठाकुर ने कलेक्टर से शिकायत कर पूरे मामले की जांच की मांग की है।
शिकायत के अनुसार स्कूल ग्रांट, एसएमडीसी प्रशिक्षण, कम्युनिटी मोबिलाइजेशन, यूथ एवं इको क्लब, सुरक्षा सामग्री, भावनात्मक स्वास्थ्य, शारीरिक शिक्षा और ग्रीन गतिविधियों सहित विभिन्न मदों में भुगतान दर्ज हैं। आरोप है कि इन मदों की राशि शिक्षक की पत्नी के बैंक खाते में अलग-अलग समय पर भेजी गई।
दुकान के नाम पर बिल, 14 बार भुगतान का दावा
शिकायत में कटंगी स्थित सॉफ्टेक कम्प्यूटर्स के नाम से अलग-अलग लेन-देन के बिल लगाए जाने का उल्लेख किया गया है। वहीं वर्ष 2024-25 में लखन चौधरी के नाम से 4,500 रुपये का भुगतान भी दर्ज बताया गया है। कुछ स्थानों पर बिना बिल के भुगतान किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि लक्ष्मी चौधरी के बैंक खाते में 14 बार राशि का भुगतान किया गया, जबकि कैशबुक एवं रोकड़ बही में केवल चार भुगतानों का ही उल्लेख है।
मामले में यह सवाल भी उठाया गया है कि कुरई विकासखंड के पीपरवानी स्कूल के लिए सामग्री की खरीदी कटंगी और तिरोड़ी, जिला बालाघाट से दर्शाई गई है। स्कूल परिसर में संबंधित दुकान संचालित नहीं होने के बावजूद वहां से खरीदी के बिल लगाए जाने को लेकर भी जांच की मांग की गई है।
प्रभारी प्राचार्य को नहीं आता था कंप्यूटर चलाना, शिक्षक से लेते थे सहयोग
इस पूरे मामले में तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य की भूमिका और भुगतान प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ सकती है। पूर्व प्रभारी प्राचार्य चरणलाल सुहाने ने बताया कि उन्हें कंप्यूटर चलाना नहीं आता था। पूर्व प्राचार्य के निधन के बाद उन्हें स्कूल का प्रभार सौंपा गया था। कंप्यूटर संबंधी कार्य और लेन-देन की प्रक्रिया में सहयोग के लिए शिक्षक लखन चौधरी की मदद ली जाती थी। उनके अनुसार शिक्षक उनकी मोबाइल आईडी पर ओटीपी लेकर भुगतान संबंधी कार्य करते थे।
वहीं मामले में यह संभावना भी जताई जा रही है कि शिक्षक लखन चौधरी जिस मोबाइल नंबर का उपयोग शासकीय लेन-देन और ओटीपी प्राप्त करने के लिए कर रहे थे, वह उनकी पत्नी लक्ष्मी चौधरी के नाम पर पंजीकृत हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना शेष है। ऐसे में मोबाइल नंबर के पंजीकरण, उसके वास्तविक उपयोग और भुगतान प्रक्रिया की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
शिक्षक ने कहा, प्राचार्य की आईडी से हुआ अनुमोदन
शिक्षक लखन चौधरी का कहना है कि सभी लेन-देन तत्कालीन प्राचार्य की आईडी से सत्यापन एवं अनुमोदन के बाद ही किए गए। इसके बाद संबंधित दुकान से सामग्री खरीदी गई। दूसरी ओर पूर्व प्रभारी प्राचार्य का कहना है कि वे कंप्यूटर संचालन में सक्षम नहीं थे और इस कार्य के लिए शिक्षक का सहयोग लेते थे। दोनों के बयानों के बीच भुगतान की वास्तविक प्रक्रिया और उसकी जिम्मेदारी तय करना जांच का महत्वपूर्ण विषय है।
नियमों के पालन पर भी उठे सवाल
शिकायत में मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के प्रावधानों का हवाला देते हुए परिवार के सदस्य से जुड़े वित्तीय लेन-देन और संभावित हितों के टकराव की जांच की मांग की गई है। यदि शासकीय राशि का भुगतान नियमों के विपरीत परिवार के सदस्य के खाते में कराया गया है, तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का विषय हो सकता है।
वर्तमान प्राचार्य आरके झोड़े ने बताया कि उन्होंने हाल ही में प्रभार संभाला है और इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
अब कलेक्टर से की गई शिकायत के बाद पूरे मामले में बैंक खातों में हुए लेन-देन, बिल-वाउचर, कैशबुक, रोकड़ बही, मोबाइल नंबर के पंजीकरण, ओटीपी के उपयोग और भुगतान की स्वीकृति देने वाली आईडी की जांच महत्वपूर्ण होगी। इन सभी दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि शासकीय राशि का भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हुआ या इसमें किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता बरती गई।