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बरघाट पुराने बस स्टैंड पर पुलिस की बैरिकेटिंग से बवाल

व्यापारी-नागरिक सड़कों पर उतरे, एक माह पहले हुए प्रशासनिक निर्णय की उड़ाई गई धज्जियां

Seoni 03 January 2026
बरघाट यशो:- बरघाट के पुराने बस स्टैंड पर शनिवार दोपहर अचानक की गई पुलिस कार्रवाई ने व्यापारियों और नागरिकों में आक्रोश फैला दिया। दोपहर करीब 1.30 बजे बरघाट पुलिस के आरक्षक नितिन द्वारा पुराने बस स्टैंड के मुख्य प्रवेश मार्ग पर बिना पूर्व सूचना बैरिकेटिंग लगाकर बसों की आवाजाही बंद कर दी गई। इससे बस स्टैंड क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और व्यापारी आक्रोशित होकर मुख्य मार्ग पर एकत्र हो गए।

व्यापारियों की भीड़ बढ़ते देख पुलिस के अन्य कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे। स्थिति बिगड़ती देख अंततः पुलिस को बैरिकेट हटाने पड़े, जिसके बाद पुराने बस स्टैंड के भीतर बसों की आवाजाही पुनः शुरू हो सकी। तब जाकर व्यापारियों और नागरिकों ने राहत की सांस ली।

Barghat old bus stand barricading protest by traders and citizen
बरघाट पुराने बस स्टैंड पर बैरिकेटिंग के विरोध में एकत्र व्यापारी और नागरिक, मौके पर पहुंची पुलिस।

एक माह पूर्व प्रशासनिक बैठक में हुआ था स्पष्ट निर्णय

गौरतलब है कि एक माह पूर्व बरघाट नगर परिषद कार्यालय में नए बस स्टैंड के संचालन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी।

बैठक में एसडीएम संदीप श्रीवास्तव,

एसडीओपी ललित गठरे,

नगर परिषद अध्यक्ष इमरता साहू,

सीएमओ वेदप्रकाश पुरी गोस्वामी,

पार्षदों, गणमान्य नागरिकों एवं नए-पुराने दोनों बस स्टैंड के व्यापारी मौजूद थे।

इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि बरघाट के दोनों बस स्टैंड सुचारू रूप से संचालित रहेंगे और दोनों स्थानों पर बसों का आवागमन जारी रहेगा।

इसी निर्णय के बाद नए बस स्टैंड पर भी बसों का संचालन शुरू हुआ था।

ऐसे में अचानक पुराने बस स्टैंड को बाधित करना प्रशासनिक फैसले के विपरीत माना जा रहा है।

अधिकारियों को नहीं थी बैरिकेटिंग की कोई जानकारी

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि –

आज की गई बैरिकेटिंग की जानकारी न तो एसडीएम संदीप श्रीवास्तव को थी,

न एसडीओपी ललित गठरे को और न ही मुख्य नगर पालिका अधिकारी वेदप्रकाश गोस्वामी को।

बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा नगर परिषद को सूचित किए की गई यह कार्रवाई कई सवाल खड़े कर रही है।

थाना प्रभारी का तर्क: शनिवार बाजार की भीड़ का हवाला

मामले में जब बरघाट थाना प्रभारी मोहनिश बैस से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि-

“बस चालकों को बार-बार समझाने के बावजूद बसें बस स्टैंड के भीतर नहीं जा रही थीं।

शनिवार साप्ताहिक बाजार की भीड़ को देखते हुए बैरिकेट लगाए गए थे।”

त्योहारों में नहीं, आज अचानक क्यों बैरिकेटिंग?

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का सवाल है कि दीपावली,

शादी-विवाह सीजन और अन्य त्योहारों में इससे कहीं अधिक भीड़ होने के बावजूद कभी बैरिकेटिंग नहीं की गई,

फिर आज अचानक बिना सूचना ऐसा कदम क्यों उठाया गया?

बताया जा रहा है कि बस स्टैंड में तैनात पुलिस कर्मचारी आमतौर पर केवल औपचारिकता निभाते हैं,

लेकिन आज की कार्रवाई ने न केवल व्यापारियों को नाराज किया,

बल्कि प्रशासनिक समन्वय की कमी को भी उजागर कर दिया।

आशंकाओं को जन्म देती कार्रवाई

बिना वरिष्ठ अधिकारियों और नगर परिषद को विश्वास में लिए पुराने बस स्टैंड के प्रवेश मार्ग को बंद करना निश्चित ही अनावश्यक टकराव और आशंका को जन्म देता है।

व्यापारियों का कहना है कि यदि भविष्य में ऐसी मनमानी कार्रवाई दोहराई गई तो वे संगठित विरोध के लिए बाध्य होंगे।

✍️ यह समाचार स्थानीय व्यापारियों, नागरिकों एवं प्रत्यक्षदर्शियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रकाशित किया गया है।

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