पीला ज़हर शहर में बह रहा, अधिकारी दफ्तरों में कैद - छिंदवाड़ा में जनस्वास्थ्य से खिलवाड़
इंदौर में मौतों के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, 10 से 23 वार्डों में गंदा पानी - नेताओं ने जताई अनहोनी की आशंका
विशेष रिपोर्ट
✦ गोविंद चौरसिया | वरिष्ठ पत्रकार,
छिंदवाड़ा यशो:- इंदौर में गंदे पानी से हुई मौतों के बाद भी प्रदेश के नगरीय निकायों के अधिकारी चेतने को तैयार नहीं हैं।
छिंदवाड़ा जिले में नगर के कई वार्डों में लोगों को गंदा और पीला पेयजल सप्लाई किया जा रहा है,
लेकिन जिम्मेदार अधिकारी न तो नगर भ्रमण करते हैं और न ही शिकायतों को गंभीरता से लेते हैं।
नतीजा—जनस्वास्थ्य सीधे खतरे में है।
10 से 23 वार्डों में पीला पानी, शिकायतें बेअसर
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वार्ड क्रमांक 10 से 23 तक कई इलाकों में
लंबे समय से पीला और दूषित पानी आ रहा है। इस संबंध में कई बार नगर निगम और अधिकारियों को शिकायतें दी गईं,
लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। छिंदवाड़ा में गंदा पानी सप्लाई किया जा रहा है,
सवाल यह है कि क्या अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
अधिकारी चमचमाती गाड़ियों में, शहर की गलियों से दूरी
नेता ने बताया कि शासन ने कमिश्नर से लेकर इंजीनियरों तक को सुविधाजनक सरकारी वाहन दिए हैं,
लेकिन वे गाड़ियाँ जनता के बीच नहीं, केवल दफ्तरों तक सीमित हैं। अधिकारी नगर भ्रमण नहीं करते,
तो उन्हें जमीनी समस्याओं का पता कैसे चलेगा?
11 नगरीय निकाय, एक भी पूर्णकालिक सीएमओ नहीं
छिंदवाड़ा जिले की 11 नगर पालिका एवं नगर परिषदों में पूर्णकालिक सीएमओ की नियुक्ति नहीं है।
अधिकांश निकाय प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं। वहीं छिंदवाड़ा नगर निगम में भी
पूर्णकालिक कमिश्नर का अभाव है, जो प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाता है।
इंदौर से सबक नहीं, फिर दोहराई जा रही वही लापरवाही
इंदौर में दूषित पानी से 15 लोगों की मौत के बाद भी हालात नहीं बदले।
वहां भी जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों की अनदेखी का आरोप लगाया था।
अब मंत्री आंसू बहा रहे हैं, लेकिन सवाल है—क्या उन आंसुओं से जानें लौटेंगी?
गरीब नल का पानी पीता है, वही सबसे अधिक जोखिम में
आरओ का पानी संपन्न वर्ग पी लेता है, लेकिन गरीब तबका आज भी नगर पालिका के नल पर निर्भर है।
यदि वही पानी दूषित है, तो सबसे पहले वही बीमार पड़ेगा।
पेयजल जैसे संवेदनशील विषय पर सरकार और प्रशासन को अत्यंत गंभीर होना होगा।
जल परीक्षण लैब की जरूरत, पीपीपी मॉडल पर हो व्यवस्था
जब गंदा पानी सप्लाई हो रहा है, तो उसकी जांच के लिए पर्याप्त प्रयोगशालाएं क्यों नहीं हैं?
हर नगर में कम से कम 15–20 जल परीक्षण लैब होनी चाहिए,
ताकि आम नागरिक भी अपने पानी की गुणवत्ता जांच सके।



