सिवनी में 70 करोड़ की निविदाओं का खेल! जनजातीय कार्य विभाग पर ठेकेदारी सिंडिकेट को संरक्षण देने के गंभीर आरोप
मुख्य सचिव तक पहुँची शिकायत, मुख्यमंत्री व मंत्रियों को भी भेजी गई प्रतिलिपि
50 लाख के मरम्मत कार्य सीधे 5 करोड़ में! नियमावली को ताक पर रखकर 7 चुनिंदा ठेकेदारों के लिए टेंडर डिजाइन?
Seoni 06 January 2026
सिवनी यशो:- सिवनी जिले में जनजातीय कार्य विभाग द्वारा एससी/एसटी छात्रावास, आश्रम शालाओं के एमओडब्ल्यू (मरम्मत), रेनोवेशन एवं अतिरिक्त कक्ष निर्माण के नाम पर लगभग 70 करोड़ रुपये की निविदाएं आमंत्रित किए जाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। छिंदवाड़ा जिले के केदारपुर निवासी राम कुमार ने पूरे मामले की लिखित शिकायत माननीय मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन को सौंपते हुए गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
दो टेंडर, एक पैटर्न – करोड़ों की गंध
शिकायत में उल्लेख है कि सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सिवनी द्वारा दो प्रमुख निविदाएं जारी की गईं—
- निविदा क्रमांक 4753/निर्माण/2025 — 8 विकासखंडों में मात्र 8 निविदाएं, कुल लागत लगभग 37 करोड़ रुपये
- निविदा क्रमांक 4566/ई-निविदा/जेजेके/2025 — जिले के विभिन्न ग्रामों में छात्रावास व अतिरिक्त कक्ष निर्माण हेतु लगभग 33 करोड़ रुपये
इस प्रकार प्रत्येक विकासखंड में 4 से 5 करोड़ रुपये की एकल निविदा आमंत्रित की गई, जिसे लेकर संदेह गहराता जा रहा है।
50 लाख के काम 10 गुना महंगे! किसके इशारे पर?
शिकायतकर्ता के अनुसार, बीते वर्षों में इन्हीं मरम्मत एवं रेनोवेशन कार्यों के लिए 50 लाख से 1 करोड़ रुपये की निविदाएं आमंत्रित होती रही हैं। लेकिन इस बार अचानक राशि को 10 गुना बढ़ाकर करोड़ों में पहुंचा दिया गया, वह भी अत्यधिक कठिन व प्रतिबंधात्मक शर्तों के साथ।
नियमावली 2.10 को नजरअंदाज कर जोड़ी गईं मनमानी शर्तें
आरोप है कि निविदा दस्तावेजों में ऐसी शर्तें जोड़ी गई हैं जिनका विभागीय नियमावली 2.10 में कहीं उल्लेख नहीं है। इन शर्तों के चलते—
- नवीन एवं छोटे पंजीकृत ठेकेदार बाहर हो गए
- स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवाओं को अवसर नहीं मिला
- स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पूरी तरह समाप्त हो गई
चुनिंदा 7 ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप
शिकायत में स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि –
निविदा की शर्तें इस तरह से तैयार की गई हैं कि पूर्व से जुड़े मात्र 7 ठेकेदारों को ही इसका लाभ मिल सके,
जो लंबे समय से जनजातीय कार्य विभाग के निर्माण कार्य करते आ रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि मध्यप्रदेश के अन्य जिलों में इसी विभाग द्वारा जारी निविदाओं में इस प्रकार की कठोर और मनमानी शर्तें नहीं पाई जातीं।
करोड़ों के राजस्व नुकसान की आशंका
यदि एमओडब्ल्यू और रेनोवेशन कार्यों की निविदाएं 50 लाख से 1 करोड़ की सीमा में, शासन द्वारा लागू सामान्य शर्तों के अनुसार आमंत्रित की जातीं, तो—
- अधिक ठेकेदार निविदा प्रक्रिया में शामिल होते
- निर्माण दरें कम आतीं
- शासन को करोड़ों रुपये की बचत होती
- टेंडर फार्म बिक्री से राजस्व में वृद्धि होती
शिकायत में क्या मांग की गई?
- सभी विवादित निविदाएं तत्काल निरस्त की जाएं
- नए सिरे से एमओडब्ल्यू/रेनोवेशन की निविदाएं आमंत्रित हों
- निविदा राशि 50 लाख से 1 करोड़ के दायरे में तय हो
- पूरे प्रकरण की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराई जाए
अब निगाहें शासन की कार्रवाई पर
शिकायत की प्रतिलिपियां मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव, संबंधित मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी जा चुकी हैं।
अब सवाल यह है कि-
क्या शासन इस कथित ठेकेदारी गठजोड़ पर कार्रवाई करेगा या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा?
शिकायतकर्ता द्वारा इस प्रकरण को निविदा घोटाला बताते हुए इसे उच्चस्तरीय जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है।



